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बाजीराव-मस्तानी की अमर प्रेम कहानी से जुड़े 'मस्तानी महल' का होगा कायाकल्प, होगा भव्य लाइट-एंड-साउंड शो

Published: Sun, 25 Oct 2026 11:03 AM (IST)

महोबा के जैतपुर स्थित ऐतिहासिक मस्तानी महल का पर्यटन विभाग द्वारा जीर्णोद्धार किया जाएगा। इस परियोजना में लाइब्रेरी, लाइट एंड साउंड सिस्टम, म्यूजियम और कैफे शामिल होंगे।

कस्बा जैतपुर स्थित मस्तानी महल

कस्बा जैतपुर स्थित मस्तानी महल

HighLights

  1. मस्तानी महल का पर्यटन विभाग करेगा जीर्णोद्धार।

  2. महल में लाइब्रेरी, म्यूजियम, लाइट एंड साउंड बनेगा।

  3. परियोजना से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

संवाद सूत्र, महोबा। पेशवा बाजीराव और मस्तानी के प्रेम का मूक गवाह मस्तानी महल अब संवरेगा। कस्बा जैतपुर स्थित यह महल जर्जर हो चुका है। पर्यटक आते तो हैं, पर दुर्दशा देख मन दुखी होता है। अब पर्यटन विभाग ने इसे संवारने की कवायद शुरू की है। एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है और स्वीकृति के बाद काम शुरू होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महल में काम होता है तो आगामी दिनों में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

एक अक्टूबर को कार्यदायी संस्था सी एंड डीएस के आर्किटेक्ट दक्ष बब्बर और अबरार ने सर्वे कर कंडीशन मैपिंग और ड्राइंग तैयार की। कहां से प्लास्टर हटाना है और कहां नया लगाना है, इसका दीवार-वार सर्वे हुआ। योजना के तहत महल में लाइब्रेरी, लाइट एंड साउंड सिस्टम, म्यूजियम और ओपन एयर थियेटर बनेगा।

एक हिस्से में कैफे भी विकसित होगा। पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वे के बाद एस्टीमेट बनाया जा रहा है, स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा। इतिहासकार डॉ. एलसी अनुरागी ने बताया कि 1737 ईस्वी में महाराजा छत्रसाल ने बेटे जगतराज को जैतपुर की जागीर दी थी।

इलाहाबाद के मुगल सूबेदार वंगश खां के आक्रमण पर महाराजा छत्रसाल ने बाजी जात बुंदेल की, बाजी राखौ बाजीराव पंक्तियां लिखकर पूना के महाराज बाजीराव से मदद मांगी। जीत के बाद मस्तानी के युद्ध कौशल देख मोहित होकर बाजीराव ने उससे विवाह किया था। तभी से यह महल बाजीराव-मस्तानी के प्रेम का गवाह बना।

महल संवरेगा तो बढ़ेंगे पर्यटक

महल को संवारने के लिए प्रयास कर रहे डॉ. सतीश राजपूत बताते है कि अभी 40-50 पर्यटक यहां आते है। महल के बाहर रास्ता, शौचालय आदि बनवाने के काम हुए। अंदर महल जर्जर हो रहा है।

कस्बा बेलाताल से होकर लोग खजुराहो, महोबा, झांसी आदि जगहों पर जाते है, यदि महज संवरेगा तो पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। कैफे आदि बनने से लोग जीवन के अहम मौके या पार्टी आदि यहां पर करने लगेंगे। जिससे लोगों को राेजगार भी मिलेगा।

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