संवाद सूत्र, कबरई (महोबा) : संयमित दिनचर्या व नियमित योगाभ्यास से रोगों को शरीर से दूर रखा जा सकता है। इसका उदाहरण कस्बे के स्पेयर पा‌र्ट्स व्यवसाई सुरेश चंद्र शिवहरे हैं। दो दशक पहले योग से जुड़ने के बाद आज तक उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक व मानसिक समस्या नहीं हुई। अब वह दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं। औद्योगिक कस्बा कबरई निवासी 55 वर्षीय सुरेश शिवहरे ने 35 साल की उम्र में पिता शिवराम शिवहरे की प्रेरणा से योग, आसन, प्राणायाम आदि क्रियाएं प्रारंभ कीं। वर्ष 2006 में शहर के हनुमान मंदिर में चलने वाले योग शिविर में योगाचार्य शिवकुमार त्रिपाठी से सपत्नि दो सप्ताह तक विधिवत योग प्रशिक्षण लिया। योग से लाभांवित होकर अपने मित्रों परिचितों व परिवारीजनों को भी जोड़ा। आज वह नगर के 25 साथियों के साथ बालिका इंटर कॉलेज में 15 वर्षो से लगातार चल रही योग कक्षा के माध्यम से योग से निरोग रहने की प्रेरणा दे रहे है। पत्नी रामजानकी, बेटी रोशनी, बहू व 4 वर्षीय नाती के साथ लाक डाउन के दौरान घर में ही योग क्रियाओं द्वारा परिवार को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ ही पड़ोसियों को भी प्रेरित किया। विश्व योग दिवस पर युवाओं को दिनचर्या सुधारने व योग से जुड़ने का संदेश देते हुए शिवहरे ने योग को निरोग रहने व प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रमुख स्त्रोत बताया।

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