महाराजगंज में आवारा कुत्तों का आतंक, झुंड में आकर बोलते हैं धावा; खतरे में बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा
भिटौली और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोग परेशान हैं।

कुत्तों के झुंड से राहगीरों को दुर्घटनाओं और बच्चों पर हमलों का खतरा बढ़ा।
HighLights
आवारा कुत्तों के झुंड से राहगीरों को परेशानी।
दोपहिया चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना।
बच्चों पर हमले और काटने की घटनाएं बढ़ीं।
संवादसूत्र, भिटौली। स्थानीय उपनगर सहित आसपास के चौराहों और गांवों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क पर झुंड बनाकर घूमने वाले कुत्तों से राहगीरों को परेशानी हो रही है।
वाहनों के पीछे दौड़ने के कारण दोपहिया चालकों के असंतुलित होकर गिरने का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह 7 बजे से पहले और शाम ढलने के बाद सड़कों पर कुत्तों के झुंड अधिक सक्रिय रहते हैं।
दोपहिया और 4 पहिया वाहनों के पीछे इनके दौड़ने से वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना या रास्ता बदलना पड़ता है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बच्चों को लेकर अभिभावक अधिक चिंतित हैं। गली-मोहल्लों में अकेले आने-जाने वाले बच्चों के पीछे कुत्तों के दौड़ने की शिकायतें मिलती रहती हैं।
पिछले कुछ समय में कुत्तों के काटने की कई घटनाएं भी सामने आई हैं। पिछले वर्ष गनेशपुर में सात वर्षीय बालिका को कुत्ते ने काटकर घायल कर दिया था। भिटौली थाना क्षेत्र के गोड़धोवा निवासी निर्मला देवी के भी कुत्ते के काटने से घायल होने की जानकारी सामने आई है। सिसवामुंशी में ननिहाल आए एक मासूम बच्चे की कुत्ते के हमले में मृत्यु होने की घटना भी सामने आई थी।
ऐसी घटनाओं के बाद आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीण प्रिंस ओझा, सूरज शुक्ल,अमरेश्वर पांडेय, इसहाक अली, पिंटू दुबे का कहना है कि शहर से गांव तक सड़कों और गलियों में आवारा कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं।
खुले में पड़े कूड़े-कचरे के कारण भी इनके एक जगह जुटने की स्थिति बनती है। लोगों ने संबंधित विभाग से समस्या का संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
