परसामलिक: धान की खेती की तैयारियों में जुटे महाव के समीप बसे तटवर्ती गांवों के किसान नाले के जर्जर पड़े तटबंध की हालत देख काफी चिंतित हैं। बारिश शुरू होते ही महाव नाला उफनाकर तटबंध व खतरनाक मोड़ों को एक साथ कई स्थानों पर तोड़कर तबाही मचाना शुरू कर देगा, लेकिन अब तक बचाव के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई इंतजाम नहीं किया जा सका है।

नेपाल से निकलकर झिगटी गांव के समीप से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाले महाव नाले की लंबाई 23 किमी है। 15 किमी हिस्सा जंगल के बाहर पड़ता है, जिसमें 65 से अधिक खतरनाक मोड़ हैं। आठ किमी हिस्सा मधवलिया व चौक उत्तरी रेंज के घने जंगल से होते हुए करौता गांव के समीप बघेला नाले में मिल जाता है। जंगली घास व पेड़ पौधों के उग आने से जंगल में महाव नाले का प्रवाह मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। इसकी अभी तक सफाई नहीं हुई है । बारिश के बाद जैसे ही नाला लाल निशान को पार करता है, जंगल में पानी का प्रवाह ठीक ढंग से न हो पाने के कारण यह बाहर अपने रेत से बने जर्जर तटबंध व मरम्मत के अभाव में खतरनाक पड़े मोड़ों को एक साथ कई स्थानों पर तोड़कर तबाही मचाना शुरू कर देता है।

किसान विध्याचल तिवारी, अनिल पांडेय, जय प्रकाश तिवारी आदि का कहना है कि अधिकांश किसान धान की खेती के लिए नर्सरी (बेहन) तैयार करने में जुटे हुए हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अमले के लोग महाव समस्या के समाधान में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। मौजूदा समय में महाव तटबंध झिगटी, छितवनिया, नरायनपुर, दोगहरा, अमहवा आदि गांवों के सामने जर्जर है।

सिचाई खंड दो के अधिशासी अभियंता इं.राजीव कपिल ने बताया कि नाला सिचाई व वन विभाग के अधीन आता है। तटबंध की मरम्मत व सिल्ट सफाई के लिए वन विभाग के अधिकारियों से बात की जा रही है।

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