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SIR in UP: एसआईआर के नियमों में बदलाव होने से फंसी नेपाल की बहुएं, हो सकती है वोट देने से वंचित

Published: Sun, 25 Jan 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) नियमों में बदलाव से भारत-नेपाल सीमा पर रह रही नेपाली बहुओं को मताधिकार से वंचित होने ...और पढ़ें

नए नियम में फंसी नेपाल की बहुएं।

नए नियम में फंसी नेपाल की बहुएं।

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अरविंद त्रिपाठी, नौतनवा। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में हुए नियमों के बदलाव के बाद भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में रह रही नेपाल की बहुओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पहले पति के नाम से मतदाता सूची में नाम दर्ज हो जाता था, लेकिन नए नियमों के तहत अब नेपाल मूल की बहुओं का एसआईआर नहीं बन पा रहा है। इससे सैकड़ों महिलाएं मताधिकार से वंचित होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

नौतनवा तहसील क्षेत्र के मुड़िला गांव में ही 45 महिलाएं नेपाल मूल की हैं, जिनका विवाह भारतीय नागरिकों से हुआ है। सरिता पत्नी अखिलेश और रामवती पत्नी प्रदीप (निवासी मुड़िला) ने बताया कि वह वर्षों से भारत में रह रही हैं, परिवार, बच्चों और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ पूरा जीवन यहीं बिता रही हैं, लेकिन अब एसआईआर के नए नियम उनके लिए बाधा बन गए हैं।

पहले एसआईआर प्रक्रिया में विवाह प्रमाण, पति का मतदाता पहचान पत्र व स्थानीय सत्यापन के आधार पर नाम दर्ज हो जाता था। नेपाल की बहुएं पति के नाम से मतदाता सूची में शामिल हो जाती थीं, लेकिन अब नागरिकता और जन्म संबंधी दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं, जो नेपाल से विवाह कर आई महिलाओं के पास उपलब्ध नहीं होते।

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन, मतदाता से पहचान व पते से जुड़े दस्तावेज लेना, फॉर्म में जन्म स्थान, माता-पिता का विवरण, दस्तावेजों की जांच के बाद सूची में नाम शामिल या विलोपित, नई व्यवस्था में जन्म और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

भारत और नेपाल के बीच वर्षों से रोटी-बेटी का अटूट संबंध रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में हजारों विवाह दोनों देशों के बीच हुए हैं। ऐसे में नेपाल की बहुओं को मतदाता अधिकार से वंचित करना इस पारंपरिक रिश्ते की भावना के विपरीत बताया जा रहा है।

नेपाल की बहुओं के लिए विशेष प्रावधान किया जाए। विवाह प्रमाण पत्र, पति का मतदाता पहचान पत्र और स्थानीय जांच के आधार पर एसआईआर की अनुमति दी जाए, ताकि वर्षों से भारत में रह रही महिलाएं लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित न हों।

एसडीएम नवीन प्रसाद ने बताया कि नेपाली महिलाएं का माता पिता का मांगा जा रहा जो नेपाल की बहुएं नहीं दे पा रही है, उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।