कभी करती थीं मजदूरी, आज चला रही हैं खुद का कारोबार; महाराजगंज की महिलाओं ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल
महाराजगंज की पंचमुखी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं धूप-अगरबत्ती बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। कभी मजदूरी करने वाली ये महिलाएं ...और पढ़ें
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HighLights
पंचमुखी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का आत्मनिर्भरता अभियान।
धूप-अगरबत्ती बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रहीं महिलाएं।
रंजीता यादव के नेतृत्व में अन्य महिलाओं को भी सिखाया हुनर।
जितेंद्र कुमार त्रिपाठी, महाराजगंज। कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए दूसरों के खेतों और घरों में मजदूरी करने वाली महिलाओं के हाथों में आज हुनर है और आंखों में आत्मनिर्भर बनने का सपना। आर्थिक तंगी से जूझने वाली इन महिलाओं ने मेहनत, लगन और एकजुटता के दम पर अपनी जिंदगी की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब वे किसी के सामने रोजगार के लिए हाथ फैलाने के बजाय खुद धूप-अगरबत्ती तैयार कर अपनी आमदनी अर्जित कर रही हैं।
इतना ही नहीं, कभी खुद संघर्षों से जूझकर आगे बढ़ने वाली ये महिलाएं अब दूसरी महिलाओं को भी हुनर सिखाकर स्वावलंबन की राह दिखा रही हैं। यह कहानी है निचलौल ब्लाक क्षेत्र के डुमरी इटहिया गांव की पंचमुखी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की, जिनकी सफलता के पीछे समूह की अध्यक्ष रंजीता यादव का संघर्ष और दृढ़ संकल्प है।
संघर्षों से निकला आत्मनिर्भरता का रास्ता
डुमरी इटहिया गांव निवासी रंजीता यादव ने एमए के साथ कंप्यूटर आइटी की पढ़ाई की है। वर्ष 2018 में शादी के बाद उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पति की सीमित कमाई से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। ऐसे में परिवार की जरूरतों को पूरा करने की चिंता उन्हें लगातार परेशान करती थी। परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने का संकल्प लिया। वर्ष 2021 में धूप-अगरबत्ती बनाने का हुनर सीखने के लिए वह मुंबई गईं। वहां से सीखी कला ने उनके जीवन में बदलाव की उम्मीद जगाई।
वर्ष 2023 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम गांव में स्वयं सहायता समूहों के गठन के लिए पहुंची। इसकी जानकारी मिलने पर रंजीता ने समूह से जुड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने गांव की गरीब महिलाओं को एकजुट किया और पंचमुखी स्वयं सहायता समूह का गठन किया। शुरुआती दिनों में संसाधनों और पूंजी की कमी बड़ी चुनौती थी, लेकिन रंजीता ने हिम्मत नहीं हारी। किसी तरह धन जुटाकर धूप-अगरबत्ती बनाने की मशीन खरीदी और महिलाओं के साथ काम शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे समूह की महिलाएं इस काम में दक्ष होती गईं। रंजीता ने रीना, साधना, पूनम पांडेय, शालू, संगीता, कुसुमावती, जागृति, विद्यावती, प्रतिमा और रबड़ी समेत दर्जनों महिलाओं को धूप-अगरबत्ती बनाने का हुनर सिखाया। आज ये महिलाएं मिलकर धूप-अगरबत्ती तैयार करने से लेकर उसकी पैकिंग तक का काम करती हैं। तैयार उत्पादों को व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं, जिससे समूह की महिलाओं को रोजगार और आमदनी का अवसर मिल रहा है।
समूह की मेहनत का असर अब गांव की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देने लगा है। रंजीता के मुताबिक, पंचमुखी स्वयं सहायता समूह की ओर से तैयार धूप-अगरबत्ती खरीदने के लिए महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर और संतकबीरनगर के व्यापारी आते हैं। नेपाल के त्रिवेणी धाम तक भी समूह के उत्पाद पहुंच रहे हैं।
