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महराजगंज में आंधी का कहर, गरीब परिवारों के आशियाने उजड़े; अब बारिश की चिंता

Published: Wed, 10 Jun 2026 11:25 AM (IST)

तेज आंधी ने महराजगंज के कई गरीब परिवारों के कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे उनके सामने बारिश में ...और पढ़ें

शीतलापुर में पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त रामकरन का घर। जागरण

शीतलापुर में पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त रामकरन का घर। जागरण

HighLights

  1. तेज आंधी से महराजगंज में कई घर क्षतिग्रस्त हुए।

  2. गरीब परिवार बारिश में बेघर होने के संकट में।

  3. पीड़ितों को प्रशासन से तत्काल मदद की उम्मीद।

संवाद सूत्र, हरिहरपुर, (महराजगंज)। एक पल की आंधी ने कई गरीब परिवारों की जिंदगी की छत ही उड़ा दी। जिन कच्चे मकानों की दीवारों के सहारे वे अपने सपने संजोए हुए थे, उन पर विशाल पेड़ गिरने से उनका आशियाना उजड़ गया। अब वर्षा का मौसम सिर पर है और इन परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षा की रातें आखिर कहां और कैसे कटेंगी।

सोमवार की शाम आई तेज आंधी में सदर क्षेत्र के बागापार निवासी सुरेंद्र राजभर और दीपचंद के कच्चे मकान पर विशाल आम का पेड़ गिर पड़ा। मकान का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घर में रखे सामान को भी नुकसान पहुंचा है।

इसी तरह मिठौरा क्षेत्र के पतरेगवा टोला शीतलापुर निवासी रामकरन और दीपचंद के घर पर भी पेड़ गिरने से दीवारें और छप्पर टूट गए। अरनहवा गांव निवासी भरत भारती का आशियाना भी आंधी की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। दैनिक मजदूरी और छोटे-मोटे कार्यों से परिवार का भरण-पोषण होता है। ऐसे में मकान की मरम्मत कराना उनके लिए आसान नहीं है।

वर्षा का मौसम शुरू हो गया है और टूटे हुए घरों में रहना खतरे से खाली नहीं है। पेड़ गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह परिवारों को संभाला। अब इन परिवारों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि क्षति का आकलन कर शीघ्र सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वर्षा के दिनों में उन्हें खुले आसमान के नीचे रात गुजारने की मजबूरी न झेलनी पड़े।

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ग्रामीण उमेश मिश्र, रामनारायन पटेल, राममिलन शर्मा, जनार्दन तिवारी, काशी प्रसाद, जुमराती ने बताया कि घटना दिन में हुई, इसलिए परिवार के सदस्य घरों से बाहर थे और कोई जनहानि नहीं हुई। यदि यही हादसा रात में होता, तो बड़ा अनर्थ हो सकता था।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन घरों की छतें टूट चुकी हैं, वहां रहने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के सामने सबसे अधिक संकट है। वर्षा शुरू होते ही घरों में पानी भरने और रातें जागकर काटने की नौबत आ सकती है। आंधी तो कुछ देर में गुजर गई, लेकिन उसके जख्म इन गरीब परिवारों के लिए लंबे समय तक परेशानी का कारण बने रहेंगे।