महराजगंज में चोर गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस ने पांच महिला समेत छह को किया गिरफ्तार
महराजगंज में पुलिस ने एक महिला चोर गिरोह का भंडाफोड़ कर पांच महिलाओं और एक ऑटो चालक को पकड़ा है। ...और पढ़ें

पुलिस ने पांच महिला समेत छह को किया गिरफ्तार।
HighLights
महराजगंज में महिला चोर गिरोह के छह सदस्य पकड़े गए।
चोरी के पिघले जेवर, नकदी और ऑटो पुलिस ने बरामद किया।
ग्राहक बनकर दुकानदारों को उलझाकर करते थे आभूषणों की चोरी।
जागरण संवाददाता, महराजगंज। महिला चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बृजमनगंज पुलिस ने पांच महिलाओं समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी के जेवर गलाकर बनाई गई करीब 5.57 ग्राम की पीली धातु की टिकिया, घटना में प्रयुक्त ऑटो, चार की-पैड मोबाइल फोन और 12,580 रुपये नकद बरामद किए हैं।
गिरोह की मुख्य आरोपित महिला मंजू पहले भी चोरी के कई मामलों में जेल जा चुकी है। सभी आरोपित गोरखपुर के रहने वाले हैं।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने कार्यालय सभागार में गिरोह का पर्दाफाश करते हुए प्रेसवार्ता में बताया कि 17 जुलाई को बृजमनगंज क्षेत्र स्थित एक आभूषण की दुकान से सोने के जेवर चोरी हुई थी। दुकान संचालक कोल्हुई थाना के बड़हरा इंददत्त निवासी नूर मोम्मद की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और गाण्डिव पोर्टल की मदद से जांच शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपित मंजू की पहचान की गई। इसके विरुद्ध गोरखपुर और महराजगंज में पहले से पांच मुकदमे दर्ज है। पहचान के आधार पर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान शुक्रवार की सुबह करीब 9.50 बजे क्षेत्र के सम्मय माता मंदिर के पास मंजू और गिरोह के अन्य सदस्य आटो से जाते दिखाई दिए। पुलिस ने तत्काल उन्हें रोकर पूछताछ शुरू की।
आरोपितों ने अपना-पता मंजू निवासी आराजी मतौनी पोस्ट कुसुमी बाजार थाना एम्स, सरिता, सोना, कुन्ती, मंजू निवासी सूबा बाजार थाना खोराबार, जनपद गोरखपुर तथा इन्दल निवासी पोछिया ब्रह्मस्थान थाना झंगहा, जनपद गोरखपुर (आटो चालक) बताया है।
गिरोह की सभी महिलाएं आपस में रिश्तेदार हैं और योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न जनपदों के बाजारों में वारदात करती थीं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने सभी आरोपितों को न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
चोरी के बाद धार्मिक यात्रा पर निकल जाता था महिला गिरोह
महिला चोर गिरोह वारदात के बाद पहचान छिपाने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके अपनाता था। गिरोह की महिलाएं ग्राहक बनकर दुकानदार को बातचीत में उलझाती थीं, जबकि अन्य सदस्य मौका मिलते ही आभूषण पार कर देती थीं।
चोरी के बाद सभी सदस्य अलग-अलग निकलतीं, लेकिन घटनास्थल तक आने-जाने के लिए हमेशा एक ही रिजर्व आटो का इस्तेमाल करती थीं। पुलिस जांच में पता चला कि वारदात के बाद गिरोह कुछ दिनों के लिए धार्मिक और पर्यटन स्थलों की यात्रा पर निकल जाता था। हाल ही में सभी सदस्य कामाख्या धाम के दर्शन कर लौटे थे।
