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लेहड़ा देवी मंदिर: महराजगंज का प्राचीन धाम, जहां पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

Published: Sat, 17 Oct 2026 01:47 PM (IST)

महराजगंज के आद्रवन जंगल में स्थित लेहड़ा देवी मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है, जहाँ सच्चे मन से ...और पढ़ें

मां लेहड़ा देवी मंदिर, आनंदनगर, महराजगंज। जागरण

मां लेहड़ा देवी मंदिर, आनंदनगर, महराजगंज। जागरण

HighLights

  1. लेहड़ा देवी मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र।

  2. महाभारत काल से जुड़ा है मंदिर का प्राचीन इतिहास।

  3. सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है।

जागरण संवाददाता, महराजगंज। लेहड़ा देवी मंदिर फरेंदा बृजमनगंज मार्ग पर आद्रवन जंगल के पास स्थित है। मंदिर के बगल में बहने वाले प्राचीन पवह नाला का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां मौजूद देवी की पिंडी पर माथा टेकने वालों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। अगल-बगल के जनपदों के साथ ही पड़ोसी राज्य बिहार व मित्र राष्ट्र नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा के साथ शीश नवाते हैं।

कैसे पहुंचे मंदिर
आनंदनगर रेलवे स्टेशन से फरेंदा बृजमनगंज मार्ग पर स्थित इस मंदिर तक जाने के लिए रेल व सड़क मार्ग की सुविधा है। रेल से लेहड़ा रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग तीन किलोमीटर है। वहीं आनंदनगर से लगभग आठ किलो मीटर है। सड़क मार्ग से जाने के लिए फरेंदा कस्बे के दीवानी कचहरी स्थित टैक्सी स्टैंड से जीप, आटो व बस की सुविधा उपलब्ध है।

जलती है अखंड ज्योति
मुख्य मंदिर के बगल में ही पौहारी बाबा का प्राचीन मठ है। यहां 24 घंटे अखंड ज्योति जलती रहती है। नवरात्र व प्रत्येक मंगलवार को लोग यहां से भभूत ले जाते हैं। साथ ही मंदिर से प्रसाद के रूप में नारियल, चुनरी, लावा भी घर ले जाते हैं।

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इतिहास
मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। जन श्रुतियों व किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर के आस पास पहले घना जंगल हुआ करता था। जंगल में ही मनोरम सरोवर के किनारे माता की पिंडी स्थापित हुई थी। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञात वास का समय यहीं व्यतीत किया था। इसी सरोवर के किनारे युधिष्ठिर ने यक्ष के प्रश्नों का जबाब देकर अपने भाइयों की जान बचाई थी। इस मंदिर की स्थापना द्रौपदी के साथ पांडवों ने की थी। चीनी यात्री व्हेनसांग ने इस मंदिर का उल्लेख अपने यात्रा वृतांत में किया है।

वास्तुकला
प्रारंभ में मंदिर केवल पिंडी स्वरूप में ही था। धीरे धीरे मंदिर की ख्याति फैलने लगी स्थानीय लोगों व मंदिर प्रबंधन के सहयाेग से इस भव्य मंदिर का निमार्ण हुआ। इसमें निरंतर विकास की प्रक्रिया जारी है। भक्तों को मां की प्रतिमा व मंदिर का भव्य स्वरूप आर्कषित करता है।

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पूरी होती है मनोकामना
महंथ देवीदत्त पांडेय ने बताया कि आद्रवन लेहड़ा देवी मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। वहीं मंदिर में मुरादे पूरी होने पर लोग हाथी, घंटा व अन्य वस्तुएं दान करते हैं। प्रसाद के रूप में लोग नारियल, चुनरी, लाई, रेवड़ी को प्रसाद के रूप में साथ ले जाते हैं।  

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मां की महिमा निराली
सच्चे मन से जो भी भक्त मां का दर्शन व पूजन कराता हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्र में मां का दर्शन करती हूं। मां सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती हैं।

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