जागरण विमर्श: महराजगंज में उद्योग और रोजगार के नए द्वार, नेपाल सीमा से विकास की राह
महराजगंज में नेपाल सीमा से सटे होने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के कारण उद्योग और रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। ...और पढ़ें


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राम मनोहर त्रिपाठी, महराजगंज। नेपाल सीमा से सटे महराजगंज में उद्योग और रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। जिले की भौगोलिक स्थिति, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, पारंपरिक हुनर और सीमा व्यापार को आधुनिक तकनीक और बड़े बाजार से जोड़कर औद्योगिक विकास को गति दी जा सकती है।
स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को संगठित स्वरूप देने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी अंकुश लगेगा। जागरण विमर्श के द्वितीय सत्र 'उद्योग और अवसर' में वक्ताओं ने महराजगंज की औद्योगिक संभावनाओं, निवेश, रोजगार और उद्यमिता पर विस्तार से चर्चा की।
पीजी कालेज के भूगोल विभाग के अध्यक्ष डा. दिवाकर सिंह ने सवाल रखा कि नेपाल सीमा से सटे और कृषि प्रधान होने के बावजूद महराजगंज औद्योगिक क्षेत्र में अपेक्षित गति क्यों नहीं पकड़ पाया। सवाल का जवाब देते हुए महराजगंज के सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया ने कहा कि जिले में कभी चार चीनी मिलें संचालित होती थीं, लेकिन बाद में दो मिलें बंद हो गईं। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में कनेक्टिविटी के विस्तार पर जोर दिया गया।
सड़क और रेल सुविधाओं के विकास से आवागमन बेहतर हुआ है। जिले में दो थ्री स्टार होटल और छोटी-बड़ी करीब 65 राइस मिलें संचालित हैं, जिनसे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा है। जिले में कौन से उद्योग की संभावना अधिक है के सवाल पर केएमसी मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डा. देवचंद कुशवाहा ने कहा कि जिले में उद्योगों की काफी संभावनाएं हैं।
पीपीपी माडल पर मेडिकल कालेज से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हजार परिवारों की आजीविका जुड़ी है। राइस मिल, मत्स्य पालन व आधुनिक कृषि के क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर किसानों को नए अवसरों से जोड़ा जा सकता है।
जिले में नये उद्योग की स्थापना, पलायन रोकने व निवेशकों को आकर्षित करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे के सवाल पर अर्थशास्त्री एवं उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने कहा कि महराजगंज की सबसे बड़ी ताकत कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, नेपाल सीमा से जुड़ाव और पारंपरिक व्यवसाय हैं। तराई क्षेत्र को फिर से चीनी और धान के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने के साथ कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने कहा कि एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में फर्नीचर और बढ़ई कला के साथ राइस मिल उद्योग को भी मजबूती से जोड़ा जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एक जिला एक व्यंजन के रूप में चयनित जिले का खोआ से बना पेड़ा नोएडा में चल रहे ट्रेड शो में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
पलायन रोकने से जुड़े सवाल पर विधायक ने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण और स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि स्थानीय हुनर को बाजार और तकनीक से जोड़ा जाए तो कारीगर रोजगार पाने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बन सकते हैं।
चेहरी में 750 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र की तैयारीः गोरखपुर के गीडा की तर्ज पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के सवाल पर विधायक ने बताया कि चेहरी में 750 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं, जिन्हें शासन स्तर से दूर किया जा रहा है। इसके बाद यहां बड़े उद्योगों की स्थापना की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
फर्नीचर उद्योग से जिले की बन रही पहचानः वक्ताओं ने कहा कि फर्नीचर उद्योग जिले की प्रमुख पहचान है। इसे संगठित उद्योग का स्वरूप देकर उत्पादन, डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ा जाए तो रोजगार का दायरा बढ़ सकता है। कृषि उत्पादों की पैकेजिंग, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन से जुड़े उद्योगों में भी पर्याप्त संभावनाएं हैं।
सीमा व्यापार का लाभ स्थानीय उद्यमियों तक पहुंचे
नेपाल सीमा से जुड़े होने के कारण जिले में सीमा व्यापार की संभावना के सवाल पर विधायक ने कहा कि सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा होने के चलते इसका लाभ केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित न रहकर स्थानीय उत्पादकों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों तक पहुंचना चाहिए। सीमा पर भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन की सुविधाओं को मजबूत करना होगा।
फोर्टिफाइड राइस से बढ़ रहा निर्यात का दायरा
राइस मिलों की क्षमता बढ़ाने के सवाल पर विधायक ने बताया कि जिले में फोर्टिफाइड राइस का उत्पादन शुरू हुआ है। पोषणयुक्त चावल का उत्पादन छह राइस मिलों में हो रहा है। कंचनपुर राइस मिल से चावल का विदेशों में निर्यात भी किया जा रहा है। इसके अलावा मैदा और सूजी का उत्पादन हो रहा है। राइस मिल की स्थापना के लिए 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।
