फिर बंद होने के कगार पर उत्तर प्रदेश का ये चीनी मिल, 9 हजार गन्ना-किसानों का साढ़े 7 करोड़ बकाया
गन्ना आवंटन न होने के कारण गड़ौरा चीनी मिल पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है, जिससे महराजगंज के 9,000 से अधिक किसान प्रभावित हो रहे हैं।

एआई जनरेटेड तस्वीर। मिल पर किसानों का 7.72 करोड़ रुपये बकाया है।
HighLights
गड़ौरा चीनी मिल को गन्ना आवंटन न होने से बंदी का खतरा।
किसानों का 7.72 करोड़ रुपये बकाया, आवंटन प्रस्ताव अस्वीकृत।
महराजगंज के गन्ना किसानों को दूसरी मिलों पर निर्भरता बढ़ गई।
जागरण संवाददाता, महाराजगंज। गड़ौरा चीनी मिल को वर्तमान पेराई सत्र में गन्ने का आवंटन न होने से मिल पर बंदी का खतरा मड़राने लगा है। महराजगंज के किसानों का गन्ना कुशीनगर व गोरखपुर की चीनी मिलों को आवंटिन किए जाने से किसान मायूस हैं। उन्हें डर सता रहा है कि यह स्थिति रही तो उनका गन्ना खेत में ही खड़ा रह जाएगा।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना आयुक्त ने मिल के पक्ष में गन्ना आवंटन के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी है। इसके चलते गड़ौरा क्षेत्र के किसानों का गन्ना कुशीनगर की हाटा और रामकोला, गोरखपुर की पिपराइच तथा महराजगंज की सिसवा बाजार चीनी मिलों को आवंटित कर दिया गया है। इस फैसले से क्षेत्र के गन्ना किसानों में मायूसी है।
किसानों को आशंका है कि स्थानीय मिल बंद रहने पर उन्हें गन्ना आपूर्ति के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। वहीं, क्रय केंद्रों के भरोसे पूरे क्षेत्र के गन्ने की समय से तौल हो पाना भी चुनौती होगी। पिछले पेराई सत्र में गड़ौरा चीनी मिल को 60.73 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ था। इस बार किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और मिल की मौजूदा स्थिति के कारण आवंटन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी।
मिल पर किसानों का 7.72 करोड़ रुपये बकाया है। इससे आगामी पेराई सत्र में मिल के संचालन पर संकट गहरा गया है। क्षेत्र में गन्ने की पैदावार अधिक है, ऐसे में किसानों को दूसरी मिलों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। गड़ौरा चीनी मिल से करीब 9,038 किसान जुड़े हैं। मिल की ओर से गन्ना खरीद के लिए लगभग 30 क्रय केंद्र भी संचालित किए जाते हैं।
किसानों का कहना है कि स्थानीय मिल चलने से ढुलाई का खर्च कम होता है और समय से तौल कराने में सुविधा रहती है। दूसरी मिलों को गन्ना भेजने पर खर्च बढ़ सकता है और पर्ची व तौल की समस्या भी सामने आ सकती है। उन्हें आशंका है कि क्रय केंद्रों के माध्यम से पूरे क्षेत्र के गन्ने की समय से खरीद नहीं हो पाएगी।
दो साल बंद रह चुकी है मिल
वर्ष 2018-19 और 2019-20 में पर्याप्त गन्ना आवंटन नहीं मिलने के कारण गड़ौरा चीनी मिल दो वर्षों तक बंद रही थी। उस दौरान क्षेत्र के किसानों का गन्ना दूसरी चीनी मिलों को भेजा गया। किसानों का कहना है कि मिल की पेराई क्षमता अधिक होने के बावजूद पर्याप्त गन्ना नहीं मिलने से क्षेत्र के किसानों को परेशानी हो सकती है। मिल की क्षमता 24 घंटे में 50 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई करने की है।
किसानों के अनुसार, चीनी मिल ने शासन से एक करोड़ गन्ना आवंटित करने की मांग की थी, लेकिन उसे मात्र 59 लाख गन्ना आवंटित हुआ और मिल दो वर्ष के लिए बंद रही। किसानों का तर्क है कि मिल चलने से क्षेत्र के गन्ने की खरीद में तेजी आएगी और उन्हें दूसरी मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उनके मुताबिक, स्थानीय मिल को गन्ना आवंटित कराकर संचालन शुरू कराना किसानों के हित में जरूरी है।
मिल प्रबंधन ने भी की आवंटन की मांग
जेएचवी गड़ौरा चीनी मिल के महाप्रबंधक गन्ना विश्वामित्र सिंह ने कहा कि किसानों के हित में मिल का संचालन जरूरी है। उनके अनुसार, पिछले दो वर्षों से किसानों को समय से भुगतान दिया गया है। किसानों को कृषि यंत्र, बीज और उन्नतशील गन्ना किस्में भी वितरित की गई हैं। उन्होंने कहा कि मिल की पेराई क्षमता और किसानों की जरूरतों को देखते हुए शासन को गन्ना आवंटित करना चाहिए।
किसानों के गन्ना मूल्य का समय से भुगतान न करने व अन्य अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए इस बार गड़ौरा चीनी मिल को गन्ने का आवंटन नहीं किया गया है। गड़ौरा चीनी मिल के हिस्से का गन्ना कुशीनगर की रामकोला और हाटा तथा गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल को आवंटित किया गया है।
जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव ने कहा कि सभी गन्ना क्रय केंद्रों का बेहतर ढंग से संचालन कराया जाएगा। किसानों का पूरा गन्ना उठने तक चीनी मिलें बंद नहीं होंगी।
