महराजगंज:

निकायों में लोगों के आवागमन की ²ष्टि से बनाई जाने वाली इंटरलाकिग सड़क व्यवस्था के खेल से प्रभावित हो रही है। एक तरफ जहां मानक से कम धन व्यय किए जाने से सड़कों को मजबूती नहीं मिल पा रही है , वहीं दूसरी तरफ बड़े वाहनों के नियमित संचालन से उसकी सूरत भी बिगड़ती जा रही है। वार्डवासी अगर जिम्मेदारों से कुछ कहते हैं तो उनकी भी बात नहीं सुनी जाती, कारण कि वह जिम्मेदार भी उसी व्यवस्था के अंग हैं। निकायों में नई बनने वाले प्रत्येक सड़क की अनुरक्षण अवधि तीन साल तक होती है। सड़क बनाने वाले जिम्मेदारों द्वारा अधिक धन बचाए जाने के चक्कर में मानक से कम निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाता है, इससे जहां व्यय कम आता है वहीं सड़क भी मजबूत नहीं बन पाती। जैसे ही उस पर ट्राली-ट्रैक्टर व अन्य बड़े वाहन चलते हैं, सड़क टूट कर बिखर जाती है। जागरण टीम ने बुधवार को नगर पालिका महराजगंज के मऊपाकड़ वार्ड में पहुंचकर पाया कि सड़क टूटी है। वार्डवासी राजाराम मद्धेशिया व छोटेलाल ने कहा कि धन बचाने के चक्कर में जैसे-तैसे सड़क बना दी गई, कहने के बाद भी अब तक न बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। आजाद नगर में रहने वाले सच्चिदानंद पटेल व रामसेवक साहू ने कहा कि सड़क बनने के कुछ समय बाद ही कुछ हिस्से का बैठ जाना निर्माण की घटिया गुणवत्ता को दर्शाता है, वार्ड के जिम्मेदार भी चुप्पी साधे रहते हैं। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजेश जायसवाल ने कहा कि वार्डवासी वार्ड में बनने वाली इंटरलाकिग सड़क की गुणवत्ता पर नजर रखें। यदि गुणवत्ता खराब हो तो उन्हें तुरंत अवगत कराया जाए।

Posted By: Jagran