महराजगंज: पिछले पांच छह महीने से एक रुपये के छोटे सिक्के को लेकर किचकिच हो रही है, न ग्राहक सिक्के लेने को तैयार है, न ही दुकानदार ले रहे है। जबकि बाजार में सिक्कों की भरमार है। एक रुपये से लेकर दस रुपये के सिक्के बैंकों ने खूब बांटे हैं। पिछले दिनों महीने से बैंकों में नकदी संकट चलने के कारण बैंकों के पास जितने सिक्के पड़े थे। धीरे-धीरे करके उन्होंने सिक्कों को बाजार में ला दिया है। इसलिए अब कहीं पर कोई सामान खरीदने पर दुकानदार सिक्के जरूर पकड़ा देता है। दस रुपये के सिक्के खूब चल रहे हैं। दिक्कत एक रुपये के छोटे सिक्कों को लेकर हो रही है। सिक्के बंद होने की अफवाह के कारण लोगों के दिलों में यह बात बैठ गई है कि छोटे सिक्के बंद हो गए हैं। इसलिए वह ले नहीं रहे हैं। जबकि ऐसा कुछ नहीं हैं। कोई भी सिक्का बंद नहीं हुआ है। अगर कोई भी व्यक्ति और दुकानदार सिक्के लेने से इन्कार करता है, तो वह भारतीय मुद्रा का अपमान है। ऐसा करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। क्षेत्र के नंदाभार, मधुबनी, मिठौरा, जगदौर,निचलौल, सिसवा, चिउटहा सबया, बहुआर, गड़ौरा बाजार सहित अन्य चौराहों पर आए दिन छोटे सिक्कों को लेकर किचकिच हो रही है। नंदाभार चौराहे पर चाय पान की दुकान के मालिक मुन्ना गौड़ बताते हैं कि अगर ग्राहक एक रुपये का छोटा सिक्का देता है, तो भी ले लेते हैं। लेकिन ग्राहक को देने पर वह मना कर देता है। यही हाल कुछ महाजन सहित पेट्रोल पंप मालिकों का भी है । उनके पास दो हजार रुपये के सिक्के जमा हो गए हैं। निचलौल स्थित दवा कारोबारी अनुराग द्विवेदी बताते हैं कि वह एक रुपये के छोटे सिक्के बैंक में जमा करने के लिए गए थे। बैंक कर्मी ने जमा करने से मना कर दिया। मैनेजर से शिकायत करने पर बाद में जैसे-तैसे सिक्के जमा हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में एक रुपये के छोटे सिक्कों को लेकर बड़ी परेशानी है। वहां पर कोई दुकानदार और कोई ग्राहक सिक्के लेने को तैयार नहीं होता है। चाहे उसको कितना भी समझा दीजिए। उपजिलाधिकारी निचलौल देवेंद्र कुमार का कहना है कि सिक्के न लेने का मामला गंभीर है। इस संबंध में शिकायत मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran