महराजगंज: जिला अस्पताल के इंसेफ्लाइटिस वार्ड की व्यवस्था बदहाल हो गई है। एक बेड पर तीन-तीन बच्चे भर्ती हैं। और तो और बच्चों के इन बेड पर तीमारदारों की भी भीड़ लग रही है। जिससे एक-दूसरे में संक्रमण फैलने का खतरा है। लेकिन अस्पताल प्रशासन लापरवाह बना हुआ है।

वायरल फीवर, निमोनिया, झटका की बीमारी के मरीजों की बहुतायत होने के कारण जिला अस्पताल खुद बीमार हो गया है। वार्ड के बेड फुल हो गए हैं। इंसेफ्लाइटिस वार्ड के 15 बेड पर 33 मरीज भर्ती हैं, जबकि सिक एंड न्यू बार्न केयर यूनिट में 20 बेड पर 47 बच्चे भर्ती हैं। चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी इन मरीजों की निगरानी तो कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन यहां की व्यवस्था सुदृढ़ करने में असहाय साबित हो रहे हैं। इंसेफ्लाइटिस वार्ड में एक बेड पर तीन-तीन बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अव्यवस्था अस्पताल का पीछा नहीं छोड़ रही है। इन बेडों पर बच्चों के साथ उनके, माता, पिता, अभिभावक व रिश्तेदार भी डेरा जमाए हुए हैं। एक मरीज के साथ एक अटेंडेंट का नियम यहां फेल हो गया है। व्यवस्था में सुधार करने की बजाय अस्पताल प्रशासन इसके लिए तीमारदारों को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। वैसे छोटी-छोटी खामियों के कारण मरीजों को भी परेशानी हो रही है, जो अपना दर्द बयां करने में भी असमर्थ हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन की भी किरकिरी हो रही है। बावजूद जिम्मेदार आंख मूंदे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एके राय ने बताया कि वार्ड में भीड़ न लगाने के लिए तीमारदारों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। हालांकि इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों को भी निर्देशित किया गया है।

दो बच्चों में जेई की पुष्टि, हड़कंप

महराजगंज: जिले में दो बच्चों में जापानी इसेफ्लाइटिस की पुष्टि होने से हड़कंप है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। महराजगंज जनपद की पकड़ी खुर्द निवासी सुनील के चार वर्षीय बेटी नैना तथा सिद्धार्थनगर जनपद के अकटेढ़वा निवासी जितेंद्र की तीन वर्षीय बेटी करिश्मा में जेई की पुष्टि हुई है। दरअसल दोनों मरीजों को इंसेफ्लाइटिस वार्ड में एक सप्ताह पहले भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया था। दोनों के जेई की जांच के लिए नमूना भी लिया गया। जिसकी रिपोर्ट 14 सितंबर को पाजिटिव आई। मुख्य चिकत्सा अधीक्षक डा. एके राय ने बताया कि दोनों मरीजों को एक सप्ताह पहले भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। लेकिन करिश्मा की तबीयत में सुधार नहीं होने पर उसे मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया है। जबकि नैना की सेहत में सुधार हो गया। इलाज चलने से वह ठीक हो गई। जिसे बुधवार को डिस्चार्ज कर दिया गया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एके श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित गांव में स्वास्थ्य टीम जाकर उसकी जानकारी प्राप्त करेगी और छिड़काव कराएगी। मरीज भले ही ठीक हो गई है, लेकिन आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निगरानी करेगी।

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