महराजगंज: कोरोना संक्रमण की वजह से माता-पिता को खोने वाले बच्चों को आर्थिक ही नहीं बल्कि मानसिक संबल की भी जरूरत है। समाज से यदि बच्चों को अपनापन मिलेगा तो उनमें पीड़ा सहने और जिदगी का मुकाबला करने का साहस भी बढ़ेगा। इन बच्चों की सुधि लेने के लिए विधायक सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी आगे आएं हैं।

बाल संरक्षण अधिकारी जकी अहमद ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए 18 वर्ष तक चार हजार रुपये प्रति माह दिया जा रहा है। जो भी इस तरह के पात्र हों, वह कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराएं। सरकार के साथ ही विभाग अपने स्तर से भी उन बच्चों की मदद करने के लिए तैयार है। समाजिक संस्था के माध्यम से भी उनकी मदद कराई जाएगी। साथ ही उनके हौसला अफजाई के लिए निरंतर संपर्क में रहा जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रेश शास्त्री ने बताया कि सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते मैं भी समाज के प्रति अपनी दायित्वों को समझते हुए अनाथ बच्चों की जानकारी जुटा रहा हूं और उन्हें मदद भी की जा रही है। बच्चों को आर्थिक सहयोग के साथ उन्हें संबल भी प्रदान करने की जरूरत है। समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए। ताकि बच्चों को अपने आस-पास बेहतर माहौल मिल सके।

सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया ने बताया कि कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना चलाई जा रही है। इसके तहत उन्हें लाभांवित किया जा रहा है। सरकार इन बच्चों का विशेष ख्याल रख रही है। जिन्होंने अपनों को खोया है, उन बच्चों को मानसिक संबल व स्नेह प्रदान करने के लिए हम सदैव उनके साथ हैं। हर संभव उनकी मदद की जाएगी। किसी प्रकार की असुविधा होने पर बच्चे व इनके अभिभावक मुझसे संपर्क कर सकते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील पांडेय ने बताया कि कोविड के चलते जो बच्चे अनाथ हो गए हैं, उनके अभिभावक के मध्यम से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की पहल सराहनीय है। मेरी संस्था द्वारा चाइल्ड लाइन के माध्यम बच्चों को परामर्श प्रदान किया जा रहा है। वहीं प्रति महिला एवं बाल विकास विभाग के मध्यम से निराश्रित बच्चों की सूची उपलब्ध कराकर योजना से जोड़कर उनके उत्थान का प्रयास किया जा रहा है। समाज के अन्य लोगों को भी इन बच्चों की मदद में आगे आना चाहिए।

Edited By: Jagran