भोटेकोशी बाढ़ ने रसुवा में मचाई तबाही, 41 किमी सड़क और आठ जल विद्युत परियोजनाएं ध्वस्त
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे 41 किमी सड़क और आठ ...और पढ़ें

निजी घरों से लेकर स्कूल, बैंक और पेट्रोल पंप तक प्रभावित। फोटो- पीटीआई
HighLights
भोटेकोशी बाढ़ से रसुवा में भारी तबाही।
41 किमी सड़क, 8 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त।
राहत-बचाव कार्य जारी, अंतरराष्ट्रीय मदद।
संवाद सूत्र, सोनौली। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ से जिले में करीब 41 किलोमीटर सड़क, पुल और सार्वजनिक संरचनाओं के साथ आठ जलविद्युत परियोजनाओं को पूर्ण रूप से क्षति पहुंची है। निजी घरों, विद्यालयों, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों तथा पेट्रोल पंपों को भी नुकसान हुआ है।
सहायक प्रमुख जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी के अनुसार, बाढ़ से 28 सरकारी एवं सार्वजनिक भवन, आठ सामुदायिक और तीन निजी विद्यालय, 14 बैंक एवं वित्तीय संस्थान तथा एक पेट्रोल पंप प्रभावित हुआ है। इसके अलावा करीब 1,500 निजी घरों को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के तेज बहाव में जिले की सड़क संपर्क व्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा है।
बाढ़ ने जिले की परिवहन व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। करीब 41 किलोमीटर सड़क, छह पक्के पुल, आठ बेलिब्रिज और 10 झोलुंगे पुल (सस्पेंशन ब्रिज) बाढ़ की चपेट में आकर बह गए। पुलों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी चुनौती बन गया है।
राहत और बचाव दलों को कई स्थानों पर मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तथा लांगटांग खोला क्षेत्र में संचालित आठ जलविद्युत परियोजनाओं को बाढ़ से पूर्ण क्षति पहुंचने की जानकारी दी गई है।
इनमें 111 मेगावाट रसुवागढ़ी, 120 मेगावाट भोटेकोशी, 20 मेगावाट चिलिमे, 20 मेगावाट लांगटांग खोला, 216 मेगावाट अपर त्रिशूली-1, पांच मेगावाट मैलुंग खोला, 60 मेगावाट अपर त्रिशूली-3ए और 37.3 मेगावाट त्रिशूली-3बी परियोजनाएं शामिल हैं। जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान से नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
बाढ़ के दौरान विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में लोगों के फंसे होने की सूचना के बाद खोज और बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं। लापता और संपर्कविहीन लोगों की तलाश के लिए दक्षिण कोरिया, भारत और चीन के विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। दुर्गम और बाढ़ प्रभावित इलाकों में हेलिकाप्टरों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
