महराजगंज: वैश्विक महामारी के रूप में सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मां-पिता व अभिभावक को खो चुके बच्चों को सुरक्षित ठिकाना मिले। इसके लिए बाल गृह में शरण देने की शासन ने घोषणा की है, जबकि जिले में एक भी बाल संरक्षण गृह नहीं हैं। स्थापना के लिए भेजे गए प्रस्ताव को भी आज जक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में बच्चों को शरण मिलने की राह आसान नहीं दिख रही है। अब तक किसी भी कारण से निराश्रित व भूले-भटके मिलने वाले बच्चों को बाल संप्रेक्षण गृह देवरिया में शरण मिलती है।

शासन ने कोरोना संक्रमण से निराश्रित हुए बच्चों के भरण-पोषण से लेकर पढ़ाई-लिखाई व बालिकाओं से शादी तक में कोई अड़चन न आने पाए इसकी चिता की है। इसके लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की शुरूआत कर दी है। इसमें व्यवस्था दी गई है कि यदि किसी कारणवश बच्चों के परिवार में कोई नहीं हैं, या फिर कोई उन्हें अपने साथ नहीं रख रहा है तो उनका पालन पोषण बाल गृह में किया जाएगा। अब देखा जाय तो जिले की स्थापना हुए तीन दशक का समय बीत चुका है, लेकिन बेसहारा मिलने वाले बच्चों को रखने के लिए आज तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। बाल संरक्षण आयोग ने मांगा था प्रस्ताव

बाल संरक्षण आयोग की तरफ से कई बार जिले में बाल संरक्षण गृह की स्थापना के लिए प्रस्ताव मांगा गया था। जिले से इसकी स्थापना के लिए महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से प्रस्ताव शासन को भेजा भी गया था। लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी। माना जा रहा है कि प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई होती और बाल गृह बन गया होता तो कोरोना संक्रमण के इस दौर में बच्चों को सहूलियत मिल जाती। 31 बच्चों को मिला है स्वीकृति प्रमाण पत्र

जिले में 70 ऐसे बच्चे चिह्नित किए गए हैं, जिनके माता या पिता की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है। इनमें से चार बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता दोनों की मौत हो चुकी है। चार अनाथ अपने रिश्तेदारों के सहारे तो अन्य सभी बच्चे अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रह रहे हैं। सरकारी सहायता के नाम पर इनमें से 31 बच्चों को ही अभी प्रति माह भरण-पोषण के लिए चार हजार रुपये की दर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने को स्वीकृति प्रमाण पत्र ही मिल सका है। जिला प्रोबेशन अधिकारी डीसी त्रिपाठी ने बताया कि 31 के अलावा अन्य के सत्यापन की कार्रवाई चल रही है, जल्द ही कार्रवाई पूरी करते हुए योजना से लाभान्वित कराया जाएगा।

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