जागरण संवाददाता, महराजगंज: गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय में ब्रहम्हलीन महंत दिग्विजयनाथ स्मृति व्याख्यान माला के पांचवे दिन ''दलित चेतना का विकास एवं भारतीय संविधान'' विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।

इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए श्रीरामश्रयदास पीजी कालेज, भुडकुडा बलिया के पूर्व प्राचार्य डा. रणजीत बहादुर सिंह ने कहा कि जाति व्यवस्था वर्ण व्यवस्था के आधार पर किया गया और इसी आधार पर शिक्षा और समाज से दलितों को दूर रखा गया। स्वतंत्रता के समय अक्षुतोद्धार के लिए महात्मा गांधी ने भी प्रहार किया और अनेक आंदोलन चलाये, जिससे दलित समाज हिंदु समाज से अलग न हो। इसके बाद डा. अंबेडकर ने दलितों के लिए जो काम किए उसमें कहीं से भी अलग राष्ट्र निर्माण का कोई संकेत नही था, बल्कि उन्होंने उपरोक्त समाज को उपर उठाने का त्वरित प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में समता नहीं होगा, तब तक देश आगे नहंी बढ़ पाएगा। स्वतंत्रता, समानता, भारतीत्व इसके प्रमुख परिचायक है। एक के बिना दूसरा अधूरा ही रहेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्म्लीन महंत दिग्विजयनाथ के चित्र सम्मुख दीप प्रज्जवलन एवं पुष्पांजलि से हुआ। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के राजनीति विषय के प्रवक्ता शैलेंद्र कुमार भारती तथा आभार बीए तृतीय वर्ष के छात्र आकाश राव ने किया।

इस अवसर प्राध्यापक डा. सरोज रंजन, डा. मनीषा त्रिपाठी, डा. राजन यादव, डा. रामदरश, सुश्री कृष्णा पटेल, सुनील यादव, दिपेंद्र पांडेय, कन्हैया वर्मा, दिलीप कुमार, देश दीपक, मनोजनाथ योगी, अशोक श्रीवास्तव, यशवंत प्रजापति, अजय त्रिपाठी, संदीप, अशोक, सोनू, गीता तथा छात्र छात्राएं उपस्थित रहें।