विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

योगी सरकार में बेटियों के विवाह की पहल लोकप्रियता के शिखर पर, सामूहिक विवाह योजना में 1.16 लाख से अधिक आवेदन

Published: Sat, 24 Oct 2026 07:01 PM (IST)

योगी सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1.16 लाख से अधिक आवेदन मिले हैं, जिसमें ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. सामूहिक विवाह योजना को 1.16 लाख से अधिक आवेदन मिले।

  2. प्रत्येक जोड़े को विवाह के लिए ₹1 लाख की सहायता।

  3. पारदर्शिता हेतु डिजिटल सत्यापन और आधार आधारित भुगतान।

डिजिटल डेस्‍क, लखनऊ। योगी सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटियों के विवाह के लिए सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत प्रदेशभर से 1,16,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 72,540 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 28,833 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है।

34,845 आवेदन स्वीकृत, पात्रता के आधार पर हो रही जांच

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि, वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राप्त कुल 1,16,668 आवेदनों में से 34,845 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि जांच के दौरान 11,679 आवेदन अपात्र पाए गए हैं। शेष आवेदनों की स्थिति स्पष्ट होने पर योजना के तहत आवेदन से स्वीकृति तक की प्रक्रिया की तस्वीर और साफ होगी। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह के खर्च में राहत देना और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न कराने में सहयोग करना है।

एक लाख रुपये की सहायता, डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के विवाह पर कुल 1 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। इसमें 64 हजार रुपये कन्या के बैंक खाते में गृहस्थी बसाने के लिए दिए जाते हैं, जबकि 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री और 15 हजार रुपये विवाह समारोह की आवश्यक व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य परिवारों पर विवाह के दौरान पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और नवदंपती को नई गृहस्थी शुरू करने में सहयोग देना है। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ई-केवाईसी और ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आय एवं जाति प्रमाणपत्रों के डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए पात्र लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सहायता राशि पहुंचाने का प्रावधान है।