डिजिटल टीम, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा एक नई और मजबूत पहचान बनाकर उभरा है। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से प्रदेश में जिला अस्पतालों से लेकर दूर-दराज के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। सरकार ने न केवल अस्पतालों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है, बल्कि ग्रामीण व शहरी इलाकों में क्रिटिकल केयर, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेवाओं, नर्सिंग शिक्षा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को प्राथमिक स्तर तक पहुंचाकर आम जनमानस के लिए बेहतर इलाज को सुलभ बनाया है।
जिला अस्पतालों से लेकर पीएचसी तक का बदला स्वरूप
स्वास्थ्य क्षेत्र में आए इस परिवर्तन के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में 109 जिला स्तरीय राजकीय एवं विशिष्ट चिकित्सालय थे, वहीं वर्ष 2026 तक इनकी संख्या 115 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ बढ़कर 234 हो गई है।
प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर बुनियादी ढांचे को सशक्त करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की संख्या को 821 से बढ़ाकर 977 किया गया है, जो इसके नेटवर्क में करीब 19 प्रतिशत की सीधी वृद्धि को दर्शाता है। इसी प्रकार, ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) की संख्या 2,811 से बढ़कर 3,035 (8% वृद्धि) हुई है।
शहरी क्षेत्रों में निर्धन और मध्यम वर्ग को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के लिए नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या में 33 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिससे इनकी संख्या 542 से बढ़कर 721 हो गई है। प्रदेश में कुल पीएचसी की संख्या अब 3,353 से बढ़कर 3,756 हो चुकी है।
स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 40% का इजाफा, 29896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर दे रहे सेवाएं
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक प्राथमिक चिकित्सा की पहुंच को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्रों के नेटवर्क को अत्यधिक मजबूत किया गया है। 2017 में मौजूद 20,573 उपकेंद्रों के मुकाबले वर्ष 2026 में इनकी संख्या लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 28,845 तक पहुंच गई है।
इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक प्राथमिक देखभाल से जोड़ते हुए प्रदेश भर में कुल 29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित 14,872 केंद्रों के साथ-साथ अन्य माध्यमों से चल रहे केंद्र और 1,425 नए नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी शामिल हैं।
543 सीएचसी में एनेस्थीसिया क्लीनिक, क्रिटिकल केयर और हाइटेक डायग्नोस्टिक सुविधाएं
अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ योगी सरकार ने गुणवत्तापूर्ण इलाज और आपातकालीन सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया है। मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से सीएचसी स्तर पर नर्सिंग शिक्षा का विस्तार किया गया, जिससे 2017 में शून्य रहे नर्सिंग कॉलेजों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है।
विशेषज्ञ चिकित्सा को ब्लॉक स्तर तक ले जाते हुए प्रदेश के 543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक और संबंधित विशेषज्ञों की तैनाती की गई है। वहीं, क्रिटिकल केयर सेवाओं को नई ताकत देने के लिए कई फैसले लिए गए हैं।
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ईसीआरपी-2 के तहत 370 सीएचसी में डिजिटल एक्स-रे मशीनें स्थापित की गई हैं।
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ब्लॉक और सीएचसी स्तर पर अल्ट्रासाउंड सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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आपात स्थितियों से निपटने के लिए 189 ऑक्सीजन प्लांट और 161 ब्लड स्टोरेज यूनिट्स पूरी तरह क्रियाशील हैं।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र का यह बदलाव केवल भौतिक इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि 'इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब', क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं के माध्यम से राज्य एक सुरक्षित, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।