लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। आपत्तिजनक पोस्टों को लेकर छिड़ी जंग में उत्तर प्रदेश में ट्विटर के विरुद्ध पहली एफआइआर इंटरनेट मीडिया के लिए सबक होगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ट्विटर ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाई। एक बुजुर्ग की दाढ़ी काटने के मामले में गाजियाबाद के लोनी थाने में एफआइआर दर्ज किए जाने के बाद अब पुलिस मामले में ट्विटर इन कारपोरेशन व ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय करेगी और साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

इंटरनेट मीडिया के जरिये उत्तर प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिशें पहले भी की जाती रही हैं और राज्य सरकार ने इस पर सख्त रुख भी अपनाया है। लेकिन, अब आइटी एक्ट के तहत हासिल इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) का दर्जा खत्म किए जाने के बाद पुलिस के लिए कार्रवाई की राह आसान हो गई है। खासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह इंटरनेट मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप की जंग तेज हुई है, उससे भी पुलिस की भूमिका और बढ़ती नजर आ रही है।

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि गाजियाबाद मामले में साक्ष्यों के आधार पर ट्विटर इन कारपोरेशन व ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है। प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि ट्विटर ने अपनी जिम्मदारी नहीं निभाई। इससे धार्मिक तनाव की स्थिति बन रही थी और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा था। ट्विटर ने आपत्तिजनक व झूठे ट्वीट को हटाने की कार्रवाई नहीं की। पुलिस अब धार्मिक उन्माद भड़काने, आपराधिक षड्यंत्र, अफवाह फैलाने व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर सभी आरोपितों पर कानूनी शिकंजा कस रही है।

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि गाजियाबाद पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए विज्ञप्ति व वीडियो बाइट के जरिए यह स्पष्ट कर दिया गया था कि घटना व्यक्तिगत विवाद के कारण हुई है और विपक्षीगण हिंदू व मुस्लिम दोनों संप्रदाय के हैं। इसके बाद भी धार्मिक वैमनस्यता फैलाने व सूबे का माहौल खराब करने के लिए पांच निजी व्यक्तियों व एक मीडिया ग्रुप ने अपने ट्वीट डिलीट नहीं किए और न ही अपने संदेशों में सही तथ्यों का उल्लेख किया।

दरअसल, गाजियाबाद के लोनी में जिस मुस्लिम बुजुर्ग अब्दुल समद की दाढ़ी काटने के मामले में पूरे प्रकरण को सांप्रदायिकता से जोड़ा जा रहा है उसमें आरोपित युवकों में से आदिल व इंतजार सहित पांच युवक मुस्लिम हैं। आदिल और इंतजार ने ही प्रवेश गुर्जर की मुलाकात अब्दुल समद से कराई और विवाद बढ़ने के बाद प्रवेश व अन्य साथियों ने साथ मिलकर बुजुर्ग को पीटा था। पुलिस आदिल, प्रवेश व कल्लू गुर्जर को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

वहीं, देर रात पुलिस ने इंतजार और बौना सद्दाम को भी गिरफ्तार कर लिया है। इंतजार व उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। इंटरनेट मीडिया पर माहौल खराब करने के आरोप में ट्विटर इंडिया और नौ अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है। बावजूद इसके इस मामले को हवा क्यों दी जा रही है इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। इस बीच एसएसपी गाजियाबाद अमित पाठक ने एक बार फिर से पूरे प्रकरण पर माहौल खराब करने वालों को चेतावनी दी है।

Edited By: Umesh Tiwari