लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश के करीब दो दर्जन विभागों में 675 गैरजरूरी कानून वर्षों से लागू रहे हैं, अब उन्हें खत्म किए जाएगा। संबंधित विभागों को लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करना होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय समाधान के लिए चल रही कार्यवाही की मानीटरिंग करेगा। मुख्य सचिव को नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष सोमवार को 'रिव्यु ऑफ मिनिमाइजिंग रेगुलेटरी कॉम्प्लायन्सेज बर्डेन' विषयक प्रस्तुतीकरण किया गया। सीएम योगी ने कहा कि सरकार 'ईज ऑफ डूईंग बिजनेस' व 'ईज ऑफ लिविंग' को पूरी तरह से लागू करना चाहती है, ताकि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से चलें और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। बोले, प्रदेश के विकास में औद्योगिक गतिविधियों का विशेष योगदान है। उससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता है। गैरजरूरी कानूनों से संबंधित सभी विभाग लंबित प्रकरणों का समाधान तय समय में कर दें। जिन कानूनों को समाप्त किया जाना है, उनके संबंध में तेजी से कार्यवाही करके उन्हें खत्म कराया जाए।

अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि इसकी पहल केंद्र सरकार ने सितंबर, 2020 में की थी, ताकि निर्धारित मापदंडों पर गैरजरूरी कानून कम हो सकें। इसके दो चरण हैं। पहला 31 मार्च में लागू हुआ, जबकि दूसरा चरण 15 अगस्त से लागू होगा। उन्होंने बताया कि दोनों चरणों के तहत 675 कॉम्प्लायन्सेज बर्डेन (गैरजरूरी कानून) को चिन्हित किया गया है। इन विभागों में श्रम, आबकारी, ऊर्जा, वन, रेरा, पर्यावरण, खाद्य एवं रसद, प्राथमिक शिक्षा, पंचायती राज, उच्च शिक्षा, हैंडलूम व वस्त्रोद्योग, गृह, चिकित्सा शिक्षा, राजस्व, आवास, मत्स्य, सिंचाई व जल संसाधन, तकनीकी शिक्षा, परिवहन एवं नगरीय विकास शामिल हैं।

इस मौके पर मुख्य सचिव आरके तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई एवं सूचना नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मनोज सिंह, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग, अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर एवं अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव नगर विकास डा. रजनीश दुबे व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

Edited By: Umesh Tiwari