लखनऊ, राज्य ब्यूरो। Data Center Policy 2021 प्रदेश सरकार बड़े शहरों के बाद अब दूर-दराज के कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में भी डाटा सेंटर खुलवाने जा रही है। इसके लिए सरकार डाटा सेंटर पालिसी-2021 में संशोधन करने जा रही है। यह संशोधन ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है। इससे भविष्य में दूरस्थ इलाकों में भी डाटा सेंटरों की स्थापना हो सकेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों व कस्बों में डाटा सेंटर की स्थापना पर फोकस

  • नीति में 900 मेगावाट के डाटा सेंटर क्षमता के साथ 30 हजार करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य रखा गया है। संशोधित नीति में एज डाटा सेंटर की स्थापना पर भी फोकस किया जा रहा है।
  • इसका उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों में छोटे डाटा सेंटरों की स्थापना कराना है। इसकी क्षमता कम से कम 50 किलोवाट होगी।
  • इसके अलावा एक डाटा सेंटर इकाई की क्षमता दो मेगावाट से अधिक और 40 मेगावाट से कम होगी।
  • इसके लिए सरकार की ओर से एज डाटा सेंटर को डाटा सेंटर यूनिट के समकक्ष प्रोत्साहनमिलेगा, लेकिन इसके लिए निवेशक को प्रदेश में कम से कम 25 एज डाटा सेंटर कीस्थापना करनी होगी।
  • संशोधित डाटा सेंटर नीति पर जल्द कैबिनेट की मुहर लगने की उम्मीद है। डाटा सेंटर क्षेत्र में नवाचार कोबढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की भी स्थापना का प्रस्ताव है।

कई राज्‍यों की डाटा सेंटर नीति का क‍िया जा रहा अध्ययन

नीति का संशोधित ड्राफ्ट बनाने से पहले सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रानिक विभाग उद्योग संघों, निवेशकों, विकास प्राधिकरणों, ऊर्जा विभाग और अन्य विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है। हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना व कर्नाटक की डाटा सेंटर नीति का अध्ययन किया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रानिक्स विभाग ने उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति 2021 बनाई थी। इस नीति से प्रदेश में एक वर्ष के अंदर ही 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाटा सेंटर पार्क और यूनिट, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 636 मेगावाट की क्षमता के लगाए जा रहे हैं।

Edited By: Prabhapunj Mishra

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