लखनऊ, जेएनएन। World Trauma Day: वाहनों की तेज रफ्तार लाखों की जिंदगी छीन रही है। वहीं, कइयों को अपंग बना बना रही है। ट्रॉमा केयर में सुधार होने के बावजूद मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। व्यक्ति में मल्टीपल फ्रैक्चर जीवन पर भारी पड़ रहा है। लिहाजा, थोड़ी सी सतकर्ता व यातायात नियमों का पालन कर खतरों से बचा जा सकता है।

वर्ल्ड ट्रॉमा डे पर शनिवार को केजीएमयू के ट्रॉमा सर्जरी विभाग द्वारा 'वाकॉथन' का आयोजन किया जा रहा है। 1090 चौराहा से लोहिया पार्क चौराहा तक मेडिकल छात्र व डॉक्टर सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों को लेकर आमजन को जागरूक करेंगे। आयोजक विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि तेज रफ्तार, ड्राइविंग के वक्त मोबाइल पर बात करना, एल्कोहल का सेवन करना, वाहन का ओवर लोड होना, सड़क खराब होना या गाड़ी में गड़गबड़ी दुर्घटना के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में देश में वर्ष 2019 में सड़क समेत वि भिन्न दुर्घटनाओं में कुल 10 लाख मौतें हुई हैं। सड़क हादसों में जहां तमिलनाडु अव्वल है। वहीं सड़क दुर्घटना में होनी वाली मौतें यूपी में सबसे ज्यादा हैं। यहां वर्ष भर में 19 हजार लोगों ने जान गंवाई हैं।

70 फीसद को हेड इंजरी

डॉ. संदीप ितवारी के मु ता िबक सड़क दुर्घटना में 70 फीसद को हेड इंजरी हो रही है। इसके अलावा चेस्ट इंजरी व एब्डॉ िमनल इंजरी मौत का कारण बन रही हैं। पेट की चोट में िलवर, ितल्ली व आंतों में रेप्चर हो जाता है। वहीं पै िल्वक बोन फ्रैक्चर भी जान ले रहा है। इन मरीजों में रक्तस्राव अ िधक होने से मरीजों की िजंदगी खतरे में पड़ जाती है।

तीन फीसद व्य िक्त अपंगता के िशकार

डॉ. समीर िमश्रा के मु ता िबक देश में िपछले कुछ वर्षों से ट्रॉमा केयर में सुधार हुआ है। ऐसे में हादसे अ िधक होने के बावजूद मौतों में कमी आ रही है। वहीं ट्रॉमा केस के अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में 16 से 17 फीसद न्यूनतम 46 िदनों तक सामान्य कार्य करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। वहीं तीन फीसद व्य िक्त चोट की वजह से अपंगता का िशकार हो जाते हैं। इनमें कई के हाथ-पैर कट जाते हैं। तमाम रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से िबस्तर पर ही रहते हैं। यह अपना दै िनक काम करने में भी अक्षम हो जाते हैं। ऐसे में दुर्घटना होने पर व्य िक्त की मदद करें। उनका वी िडयो बनाने के बजाए पु िलस या एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजें। मरीजों के िलए एक घंटा गोल्डेन ऑवर माना जाता है। वहीं 10 िमनट प्ले िटनम टाइम होता है। यानी िक िकसी भी नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर मरीज का 10 िमनट में उपचार शुरू करा दें। उसका रक्तस्राव बंद हो जाए। प्राथ िमक उपचार कराकर तत्काल हायर सेंटर रेफर कराएं।

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