लखनऊ (जेएनएन)। सपनों के लिए अपनों से दूरी उसे कमजोर नहीं बनाती है। ऐसे ही नहीं घर की चहारदीवारी के बाहर निकल कर भी वह अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। उनके जीवन संघर्ष से शक्ति का ऐसा स्वरूप उभरता है जिसमें स्वाभिमान छलछलाता प्रतीत होता है। अपने कर्म के साथ अपना धर्म निभाने में भी उसका कोई सानी नहीं है।

तुम किस मिट्टी की बनी हो, हर सांचे में ढल जाती हो। 

बेटी, बहन, पत्नी, बहू तो कभी मां बन जाती हो।।

स्त्री धर्म के साथ-साथ कर्म की धुरी भी तुम हो। 

सिर्फ परिवार नहीं संसार का आधार स्तंभ भी तुम ही हो...।।

स्त्री हर रूप में अटूट है। घर की चहारदीवारी के बाहर उसकी पहचान और भी है। कभी वह किताबों के बीच उलझती दिख जाएगी तो कभी घुंघरुओं संग थिरकती हुई। काला कोट पहन लेती है तो कभी सफेद एप्रेन के साथ जूझती नजर आती है। संघर्ष की कूची जब-जब उठी है तो स्त्री शक्ति की एक नई तस्वीर सजी है। इस तस्वीर में सफलता के साथ-साथ स्वाभिमान के रंग भी हैं। सपनों के लिए अपनों से दूरी है तो हौसला अफजाई भी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर चल रही शृंखला की पहली किस्त में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की जानकारी और जमीनी स्तर पर उनके हाल की पड़ताल की गई थी। इस कड़ी में आज नारी के उस रूप को सलाम जिसने सिर्फ एक प्रेरणा से स्त्री धर्म के साथ अपने कर्म में न सिर्फ बेहतर तालमेल बिठाया, बल्कि अपने और अपनों के सपने को स्वरूप भी दिया। 

नृत्य के लिए अपनों से जंग  

नाम : मंजू मलकानी जोशी 

जन्म : अल्मोड़ा 

ससुराल : अल्मोड़ा (उत्तराखंड) 

कार्यस्थल : कथक टीचर, भातखंडे संगीत संस्थान समविश्वविद्यालय, लखनऊ  

कक्षा चार में पढ़ती थी। तब अल्मोड़ा में भातखंडे विद्यापीठ की नई शाखा खुली थी। मैंने ज्वाइन कर लिया। उस समय डीडी वगैरह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने नृत्य की ललक पैदा की। पिता बैंकिंग क्षेत्र में जाने के लिए कहते थे पर मेरा मन तो घुंघरुओं में रमा था। परिवारवालों ने रोका पर नृत्य क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए वर्ष 2005 में लखनऊ आ गई। भातखंडे में बीपीए और पारंगत में दाखिला लिया। पांच साल हॉस्टल में रहकर एमपीए पूरा किया। उसके बाद कथक केंद्र में गुरु शिष्य परंपरा में सुरेंद्र सैकिया जी से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। इस दौरान बच्चों को नृत्य प्रशिक्षण देकर अपना खर्च चलाया। वर्ष 2015 में भातखंडे में कथक टीचर बनी। वर्ष 2016 में विवाह हुआ। ससुराल वालों ने भी मना किया पर नृत्य प्रेम है जो मुझे लखनऊ छोडऩे नहीं देता। 

यादगार प्रस्तुति : 26 जनवरी 2015 में राजपथ पर पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा के सामने उप्र को प्रजेंट करने का मौका मिला। राष्ट्रपति भवन और पीएम भवन पर प्रस्तुतियां भी यादगार हैं। 

रोल मॉडल : कथक गुरु सुरेंद्र सैकिया जी और भातखंडे संस्थान की वीसी श्रुति मैम रोल मॉडल हैं। 

संदेश : अपने सपनों को अधूरा मत छोड़ो। मेहनत कर उन्हें हासिल करो।  

डॉक्टर बनने के लिए दूरी 

नाम : सीमा भारती 

जन्म : बलिया

ससुराल : गोरखपुर 

कार्यस्थल : ट्रेनी फीजियोथेरेपिस्ट, न्यूरो सर्जरी, केजीएमयू, लखनऊ 

मां सुधा रानी गृहिणी और पिता रमाकांत भारती पोस्ट ऑफिस में कार्यरत हैं। मैं हमेशा से डॉक्टर ही बनना चाहती थी। वर्ष 2009 में विवाह हुआ। पति विनय कुमार से अपनी इच्छा जाहिर की। ससुराल वालों ने साथ दिया और वर्ष 2011 में गोरखपुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज में फीजियोथेरिपी कोर्स में दाखिला लिया। वर्ष 2012 में बेटे अर्पित का जन्म हुआ। बेटा छोटा था पर पढ़ाई जारी रखी। उसके बाद अक्टूबर 2017 से केजीएमयू में इंटर्न के तौर पर हूं। छह साल का बेटा रोज जिद करता है पर छुट्टियों में ही उससे मिलना हो पाता है। 

रोल मॉडल : मेरे पति मेरे हीरो हैं। पिता की मौत के बाद उन पर परिवार की जिम्मेदार बहुत कम उम्र में आ गई थी। वह जीवन में शिक्षा का महत्व बखूबी समझते हैं। 

संदेश : शादी के बाद जिम्मेदारियां निभाते हुए भी बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। बशर्ते लगन सच्ची हो।

किताबों के साथ दायित्व का पाठ 

नाम : डॉ. नीरांजलि सिन्हा 

जन्म : रायपुर (छत्तीसगढ़) ससुराल : लखनऊ 

कार्यस्थल : क्षेत्रीय निदेशक, उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, लखनऊ

छत्तीसगढ़ से लखनऊ का सफर शुरुआत में सांस्कृतिक अंतर लेकर आया। सास डॉ. कांति केशी सिन्हा खुद प्रगतिशील सोच की महिला थीं इसलिए ढलने में आसानी हुई। सन् 1988 में बेटे शाश्वत के जन्म के बाद बचपन से मन में पली शिक्षिका बनने की इच्छा और प्रबल हुई। वर्ष 1991 में एक छोटे से स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। लखनऊ विवि से पीएचडी करने के बाद वर्ष 2000 में गुरुनानक देव डिग्री कॉलेज में लेक्चरर के रूप में नियुक्त हुई। वर्ष 2003 में प्रिसिंपल बनकर प्रशासनिक अनुभव भी मिला। वर्ष 2013 में राजर्षि पुरुषोत्तम मुक्त विश्वविद्यालय से जुड़ गई। एक शिक्षित बेटी दो परिवारों को शिक्षित करती है। यही सोचकर ग्रामीण परिवेश से आने वाली लड़कियों की काउंसिलिंग कर उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखा। मालवीय मिशन स्कूल से भी जुड़कर बच्चों को शिक्षित कर रही हूं। 

रोल मॉडल : पति आरके सिन्हा और रायपुर के रविशंकर विवि के प्रो. एमए खान रोल मॉडल हैं। दोनों शिक्षित बनो और शिक्षित करो के लिए प्रेरित करते हैं। 

संदेश : कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता। हर महिला खुद को किसी न किसी काम से जोड़े रखे। 

 

घर पर सब वकील तो मैं क्यों नहीं 

नाम : कंचन भट्ट 

जन्म : प्रतापगढ़

ससुराल : प्रतापगढ़  

कार्यस्थल : वकील, पारिवारिक न्यायालय, लखनऊ 

माता शकुंतला गृहिणी और पिता कृष्ण मुरारी भट्ट वकील हैं। बाबा, चाचा, भाई सब वकालत से ही जुड़े रहे। चार बहनों में सिर्फ मैंने ही वकालत को चुना। तर्क था कि घर पर सब वकील तो मैं क्यों नहीं? वर्ष 1996 में बिजनेसमैन गोविंद लाल शर्मा से विवाह हुआ। डॉक्टर ससुर मुझे टीचिंग में जाने के लिए कहते थे। सास संतोष देवी का सपोर्ट मिला और उन्होंने ससुर को मनाने में सहायता की। वर्ष 2003 में एलएलबी की। तब से पारिवारिक न्यायालय में अधिवक्ता के तौर पर हूं। खास बात यह है कि विवाह के बाद भी भट्ट सरनेम के साथ ही काम कर रही हूं। अच्छा लगता है जब लोग हमें हमारी पहचान से जानते हैं।

रोल मॉडल : पिता और ससुर आदर्श हैं। दोनों बेटियों को पढ़ाने के हिमायती हैं। 

संदेश : न्याय प्रणाली में विश्वास रखें। किसी भी तरह की हिंसा का सामना कानून के जरिए करें।

 

By Nawal Mishra