लखनऊ, जागरण संवाददाता। औषधीय पौधे भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की रीढ़ की हड्डी कहे जाते हैं। कोरोना काल में इनका प्रयोग तेजी से बढ़ा। अब यह देखा जाएगा कि कितने लोग औषधीय पौधे का उपयोग रोजाना कर रहे हैं। इसके लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमृतेश चंद्र शुक्ल ने अपनी टीम के साथ आनलाइन सर्वे शुरू किया। इसमें राज्य आयुर्वेदिक कालेज के प्रो. माखन लाल, केजीएमयू के कम्युनिटी मेडिसिन एवं पब्लिक हेल्थ विभाग की डा. नीतू शुक्ला भी शामिल हैं। यह सर्वे 30 जून तक चलेगा।

लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमृतेश चंद्र शुक्ल बताते हैं कि भारत में 70 फीसद आबादी गैर एलोपैथिक पद्धति का उपयोग करती है। इसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा शामिल है। कोविड की तीसरी लहर आने के बाद औषधीय पौधों के बारे में जनता की धारणा जानने के लिए यह सर्वे किया गया है। इसके लिए एक प्रश्नावली बनाई गई है। इसमें पूछा गया है कि कोविड-19 का मुकाबला करने में औषधीय पौधों से मदद मिली या नहीं। कौन सा पौधा औषधीय रूप में अधिक लाभदायक रहा। इस प्रश्नावली को गूगल फार्म के माध्यम से जारी किया गया है। 30 जून के बाद इन प्रश्नों के उत्तर का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 

वर्ष 2020 में हुआ था पहला सर्वे: प्रो. अमृतेश चंद्र शुक्ला बताते हैं कि वर्ष 2020 में कोविड की पहली लहर आने के बाद औषधीय पौधों पर आनलाइन सर्वे किया था। जिसके नतीजे काफी अच्छे आए थे। सर्वे में शामिल 72 फीसद प्रतिभागियों ने बतया कि वह दैनिक जीवन में औषधीय पौधों का उपयोग करते हैं। कुल आंकड़ों में 81 फीसद ने कहा कि कोविड-19 रोग को रोकने के लिए वह इसका प्रयोग करते हैं। 76.7 फीसद लोग अदरक, 75.4 फीसद लोग तुलसी, 69.8 फीसद लोग हल्दी, 58.2 फीसद लोग काली मिर्च का उपयोग करते हैं।

Edited By: Vikas Mishra