Navratri 2022: लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। मां का हर स्वरूप श्रद्धालुओं को अपनी ओर खीचता है। 26 सितंबर को कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक मां की आराधना शुरू हो जाएगी। रविवार को पितृ विसर्जनी अमावस्या के साथ ही अगले दिन से नवरात्र शुरू हो जाते हैं। आचार्य अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि मां के स्वरूप के अनुरूप रंगों का चयन करने से मां की विशेष कृपा मिलती है। प्रथम शैलपुत्री की पूजा में पीले रंग का प्रयोग शुभकारी होता है। पुष्प और वस्त्रों को चढ़ाने या खुद धारण करने में मां की कृपा बरसती है।

मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की आराधना हरे रंग के कपड़े पहनकर करना चाहिएद्ध समृद्धि के प्रतीक इस रंग से मां खुशहाली का वरदान देती हैं। नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना स्लेटी रंग के कपड़े पहनकर करनी चाहिए। मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा की नारंगी रंग के कपड़े पहनकर करने से वह प्रसन्न होती है। मां का पांचवा स्वरूप स्कंद माता का होता है।

सफेद रंग बेहद पसंद है। ऐसे में इसका प्रयोग करने वाले श्रद्धालुओं की कामना पूरी होती है, वस्त्र से इतर भी पुष्पों का प्रयोग पूजन में सकते हैं। मां का छठां स्वरूप कात्यायनी के नाम से जाना जाता है, इनकी लाल रंग के वस्त्र और पुष्पों से पूजा करनी चाहिए। मां का सातवां स्वरूप कालरात्रि का होता है और नीले रंग के वस्त्र धारण कर पूजा करना श्रेयस्कर होगा।

मां के आठवें स्वरूप महागौरी को गुलाबी और नौवे दिन मां सिद्धिदात्री स्वरूप की बैंगनी या जामुनी रंग के कपड़े धारण कर पूजा करनी चाहिए। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि मां की आराधना शुद्ध मन से करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। ऐसे में सभी को अपनी श्रद्धा के अनुसार मां के हर स्वरूप की आराधना करनी चाहिए। नवरात्र में मांं की कृपा बरसती है।

Edited By: Vikas Mishra