लखनऊ [राजीव दीक्षित]। बारिश के बूंद-बूंद पानी को संजोने के लिए जताये जा रहे तमाम सरोकारों के बीच यह विडंबना ही है कि उत्तर प्रदेश के 31,811 तालाब व झील अवैध कब्जे का शिकार हैं। जल के प्राकृतिक स्रोत के साथ पानी के यह अनमोल भंडार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करने में धरती की कोख सूखी जा रही है। भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट ने नीति नियंताओं और पर्यावरणविदों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। यही वजह थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बारिश की हर बूंद हो सहेजने का आह्वान करना पड़ा। बारिश के पानी को संरक्षित करने के साथ भूजल को रीचार्ज करने में तालाबों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वर्ष 1952 (फसली वर्ष 1368) में उत्तर प्रदेश में राजस्व अभिलेखों में 7,96,902 तालाब दर्ज थे, जिनका कुल क्षेत्रफल 3,62,282.26 हेक्टेयर था। विकास की अंधाधुंध रफ्तार में पानी के यह भंडार अतिक्रमण का शिकार होकर अपना वजूद खोते गए। राजस्व परिषद की ओर से पिछले हफ्ते तैयार की गई समीक्षात्मक रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 31,811 तालाब अतिक्रमण का शिकार हैं। अवैध कब्जे की गिरफ्त में आए इन तालाबों का कुल क्षेत्रफल 6884.63 हेक्टेयर है। वहीं प्रदेश में 7,61,224 तालाब अतिक्रमण मुक्त हैं जिनका कुल रकबा 3,53,304.33 हेक्टेयर है।

अतिक्रमण का शिकार सबसे ज्यादा तालाब फतेहपुर जिले में हैं। अतिक्रमण से मुक्त कराये गए तालाबों की संख्या को दरकिनार भी कर दें तो फतेहपुर में 6207 तालाबों पर अवैध कब्जे बरकरार हैं। महाराजगंज जिला इस मामले में दूसरे पायदान पर है जहां 4157 तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। प्रयागराज तीसरे स्थान पर है जहां 1698 तालाबों पर अतिक्रमण है। लखनऊ में 1513 और सहारनपुर में 1480 तालाबों पर अतिक्रमण है।

वहीं प्रदेश के छह जिलों में एक भी तालाब पर अतिक्रमण न होने का दावा किया गया है। इनमें जौनपुर, झांसी, बहराइच, ललितपुर, श्रावस्ती और सोनभद्र जिले शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कब्जे से मुक्त कराने के बाद खोदवाये गए तालाबों की संख्या 42,311 है। ऐसे तालाबों का कुल क्षेत्रफल 17,920 हेक्टेयर है।

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