लखनऊ (जेएनएन)। किसानों की कर्जमाफी को लेकर मंगलवार को विधान परिषद में विपक्षी दलों और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्षी दलों ने जहां सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश की, वहीं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों की बदहाली के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। प्रश्नकाल के दौरान कृषि मंत्री ने बताया कि फसल ऋण मोचन योजना के तहत सात मार्च तक प्रदेश में 34.11 लाख किसानों का 20598.31 करोड़ रुपये कर्ज माफ हुआ है।

87 फीसद किसान सीमांत व लघु 

शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सरकार ने एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की बात कही थी लेकिन किसानों के 50,100 रुपये तक के कर्ज माफ हुए हैं। इस पर कृषि मंत्री ने उन्हें कर्ज माफी की शर्तों से अवगत कराया। यह भी बताया कि पांच मार्च से पहले तक 9.47 लाख किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ हुए हैं। विपक्षी सदस्यों ने जानना चाहा कि सरकार ने कर्ज माफी के लिए एक लाख रुपये की सीमा क्यों तय की? इस पर शाही ने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि प्रदेश के 87 फीसद यानी 2.13 करोड़ किसान सीमांत व लघु श्रेणी के हैं। 

कर्ज माफी बजट में 36 हजार करोड़ 

सपा के शतरूद्र प्रकाश ने जानना चाहा कि सरकार ने तो कर्ज माफी के लिए बजट में 36 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये थे। जो 15 हजार करोड़ रुपये बचे हैं, 31 मार्च के बाद सरकार उसका क्या करेगी? जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि कर्जमाफी की जो रकम बचेगी, वह प्रदेश के विकास और किसानों के कल्याण पर खर्च की जाएगी। सपा के बलराम यादव ने कहा कि भाजपा ने संकल्प पत्र में झूठे वादे किये। इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प पत्र हमारे लिए वेद वाक्य है। सपा के आनंद भदौरिया ने सरकार पर कर्ज माफी के प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रमों में अनापशनाप खर्च करने का आरोप लगाया। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कर्जमाफी को लेकर सरकार भ्रामक जानकारी दे रही है। सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।

किसका कितना कर्ज माफ

कर्ज माफी की राशि - किसानों की संख्या

  • एक लाख रुपये - 9.47 लाख
  • 75000 से एक लाख रुपये - 4.21 लाख
  • 50000 से 75000 रुपये - 6.45 लाख
  • 25000 से 50000 रुपये - 8.14 लाख 
  • 10000 से 25000 रुपये - 4.04 लाख
  • 5000 से 10000 रुपये - 92 हजार
  • 1000 से 5000 रुपये - 85 हजार
  • 1000 रुपये तक - 24 हजार

गेहूं खरीद के लिए 110 रुपये प्रति क्विंटल अधिक देंगे

कृषि मंत्री ने सदन को बताया कि इस बार सरकार गेहूं खरीद के लिए 110 रुपये प्रति क्विंटल अधिक समर्थन मूल्य देगी। पिछली बार किसानों से 1625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से गेहूं खरीदने के लिए प्रदेश में 5500 क्रय केंद्र खोले जाएंगे।

Posted By: Nawal Mishra