लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाने के मामले में जेल में बंद मेसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन विक्रम कोठारी को खराब सेहत के मद्देनजर सर्जरी कराने के लिए शुक्रवार को आठ सप्ताह की जमानत दे दी। साथ ही बंदिशें भी लगाई हैं। उन्हें अपना पासपोर्ट विचारण अदालत में जमा करने तथा अपनी लोकेशन की सूचना देते रहने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि आठ हफ्ते बीतते ही वह सरेंडर कर देंगे और हलफनामा दायर कर हाईकोर्ट को इस संबध मे सूचना देंगे।

विक्रम कोठारी एसजीपीजीआइ में भर्ती 

जस्टिस एआर मसूदी की बेंच ने विक्रम कोठारी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने पूर्व में 30 नवंबर 2018 को कोठारी की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। बाद में कोठारी की ओर से चिकित्सीय समस्याओं को आधार बना थोड़े समय के लिए जमानत देने की मांग की गई थी ताकि वह सर्जरी करा सके। इस समय विक्रम कोठारी जेल से एसजीपीजीआइ में भर्ती हैं। उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी, 2018 को इस मामले की शिकायत बैंक ऑफ बड़ौदा, कानपुर के रीजनल मैनेजर बृजेश कुमार सिंह ने मेसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ इसके चेयरमैन विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी साधना कोठारी व बेटे राहुल कोठारी तथा बैंक के अज्ञात अफसरों के खिलाफ सीबीआइ में दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक मेसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने आपराधिक साजिश व धोखाधड़ी के जरिए बैंक ऑफ इंडिया, ओरियन्टल बैंक ऑफ कामर्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया व इंडियन ओवरसीज बैंक को करोडों रुपये का चूना लगाया है। 

बेटे राहुल पहले मिल चुकी जमानत 

शिकायत में कहा गया था कि इन सात बैंको ने अभियुक्तों की कंपनी को नॉन फंड बेस्ड और फंड बेस्ड 2129 करोड़ रुपये की लिमिट मंजूर की थी। जिसके एवज में कंपनी पर 2919.39 करोड़ रुपये बकाया हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 435 करोड़ की क्रेडिट की सुविधा कंपनी को दी थी, जिस पर 456.63 करोड़ की देनदारी कंपनी पर है। यदि वह विदेश भाग गए तो कई कानूनी पेचीदगियां सामने आएंगी। गौरतलब है कि विक्रम कोठारी के बेटे राहुल की नियमित जमानत अर्जी गत 30 नवंबर को मंजूर हो चुकी है।

 

Posted By: Nawal Mishra