लखनऊ(जेएनएन)। वाहन के पंजीयन नंबर के लिए फाइल लेकर आरटीओ और डीलर के चक्कर लगाने वाली परंपरा पर सोमवार से विराम लग गया है। वाहन स्वामी को बेवजह इधर-उधर नहीं भागना पडे़गा। चल रहे ट्रायल रन के बाद राजधानी लखनऊ समेत छह जिलों में डीएमएस 'डॉक्यूमेंट्स मैनेजमेंट सिस्टम' व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी गई है। इसके तहत डीलर अब वाहन के कागजात तैयार कर ऑनलाइन फाइल आरटीओ को भेजेगा। कागजात की पड़ताल के बाद संभागीय परिवहन कार्यालय रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर देगा। अगर कागजात पूरे नहीं हैं या फिर कोई गड़बड़ी है तो उसे आरटीओ को तत्काल डीलर को कारण बताते हुए उसे वापस भेजना होगा। हफ्ते भर के भीतर आरटीओ को वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करना होगा। प्रथम चरण में लखनऊ, हरदोई, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर, उन्नाव जिले में सोमवार से इसे लागू कर दिया गया है। अभी तक पंजीयन के लिए फार्म 20, 21, 22, इंश्योरेंस प्रमाणपत्र, पता प्रमाण पत्र समेत विभिन्न प्रपत्र उपलब्ध कराये जाने होते थे। इन्हें मैनुअल डीलर द्वारा आरटीओ कार्यालय एक फाइल के रूप में भिजवाया जाता था। इसका नतीजा यह होता था कि अक्सर फाइल समय से न पहुंचने पर वाहनस्वामी पंजीयन के लिए डीलर और संभागीय परिवहन कार्यालयों के चक्कर लगाता था। अब ऐसा नहीं होगा। वाहनस्वामी को तय समय से पंजीयन प्रमाणपत्र मिलेगा।

क्या कहते हैं अफसर ?

आरटीओ के आइटीसेल मुख्यालय संजय नाथ झा के मुताबिक, ट्रायल रन के बाद व्यवस्था शुरू कर दी गई है। डीलर अब डाक्यूमेंट्स को स्वयं लोड कर संभागीय परिवहन कार्यालयों को ऑनलाइन फाइल के रूप में भेजेंगे। इससे एक इलेक्ट्रानिक डाटा भी तैयार होगा।

Posted By: Jagran