लखनऊ, जेएनएन। शुल्क कम होने से जांच केंद्रों के बढ़े खर्च को लेकर हाथ खड़े कर रहे आनॅलाइन सेंटर की दिक्कतों को लेकर परिवहन विभाग प्रदूषण शुल्क बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसे लेकर गठित की गई कमेटी ने प्रस्ताव तैयार कर परिवहन आयुक्त को भेज दिया है। सहमति बनते ही इसे शासन भेजा जाएगा। प्रस्तावित दरों में बीस से लेकर पचास रुपये तक की वृद्धि की गई है।  

ये है वजह

प्रदूषण जांच केंद्रों पर अभी तक गाडिय़ों की जांच के लिए मैनुअल और कामचलाऊ व्यवस्था थी। अब इसे कप्यूटराइज्ड करते हुए मुख्यालय से जोड़ दिया गया है। इस पर बिजली, इंटरनेट, तकनीकी जानकार का औसत वेतन, प्रिंटर समेत जिस कंपनी की मशीन है। उसके साथ सालाना रखरखाव के खर्च का करार आदि कई नई व्यवस्थाओं से प्रदूषण केंद्र चलाने वालों का ज्यादा खर्च आ रहा है। ऐसे में जांच केंद्र चलाने वाले अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। साथ ही अरसे से फीस में वृद्धि तक नहीं की गई है। 

पहले और प्रस्तावित दरें (रुपये में)

दोपहिया-30-50   

चौपहिया-40-70 

चौपहिया-बड़े डीजल वाहन-50-100

नई जुर्माना राशि 10 हजार 

नए एक्ट में बढ़ी जुर्माने की धनराशि अब दस हजार रुपये तय कर दी गई है। साथ ही तीन माह के जेल का प्रावधान किया गया है। 

क्‍या कहते हैं अफसर ?

एआरटीओ परिवहन कमल जोशी ने बताया कि प्रदूषण जांच केंद्रों की दिक्कतों को देखते हुए फीस बढ़ाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर ली जाने वाली फीस बढ़ाने के लिए राशि तय की जा रही है जिससे जनता पर बोझ भी न पड़े और ऑनलाइन सेंटर का काम भी चलता रहे। 

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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