यूपी में सड़क सुरक्षा पर खर्च होंगे 10 करोड़ रुपये, मुख्य सचिव ने दिए दुर्घटनाओं में कमी लाने के निर्देश
उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए परिवहन विभाग और यातायात निदेशालय 10 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। ...और पढ़ें
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HighLights
सड़क सुरक्षा पर 10 करोड़ रुपये खर्च करेगा परिवहन विभाग।
मुख्य सचिव ने दुर्घटनाएं कम करने के दिए निर्देश।
रोड सेफ्टी क्लबों और सेफ सिटी योजनाओं को मिलेगा बजट।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए परिवहन विभाग व यातायात निदेशालय सड़क सुरक्षा पर 10 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में हुई कोष प्रबंधन समिति की बैठक में परिवहन विभाग व यातायात निदेशालय के लिए 222.06 करोड़ रुपये के बजट की भी स्वीकृति दी गई है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के निर्देश भी दिए हैं।
बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए परिवहन विभाग के लिए 187.10 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति दी गई है। इसी प्रकार यातायात निदेशालय के लिए 34.96 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर इंटरसेप्टर वाहनों की निगरानी के लिए मानीटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए।
बजट में युवाओं एवं विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों व माध्यमिक विद्यालयों में गठित 3074 रोड सेफ्टी क्लबों के लिए 1.53 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। साथ ही शिक्षण संस्थानों में सेफ सिटी व सेफ जिला योजना के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए 1.32 करोड़ रुपये भी बजट में रखे गए हैं।
महत्वपूर्ण निर्णय
-सड़क सुरक्षा जागरूकता को लेकर लखनऊ के लिए 8 लाख रुपये, मंडल मुख्यालय वाले जिलों व गौतमबुद्ध नगर के लिए 72 लाख तथा शेष 56 जिलों के लिए 1.6 करोड़ रुपये बजट में रखे गए हैं।
-28 जिलों में सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के संचालन के लिए 28 लाख रुपये रखे गए हैं।
-सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मृत्यु वाले जिलों, हरदोई, मथुरा, आगरा, लखनऊ, बुलंदशहर, कानपुर नगर, प्रयागराज, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, बरेली, अलीगढ़, गौतमबुद्ध नगर, शाहजहांपुर, गोरखपुर, कुशीनगर,बदायूं, मेरठ, बिजनौर, आजमगढ़, फतेहपुर, गाजियाबाद, जौनपुर एवं फिरोजाबाद के लिए प्रति जिला 1.2 करोड़ का प्रविधान भी किया गया है। शेष जिलों में प्रति जिला 70-70 लाख रुपये रखे गए हैं।
