लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) दोबारा दिसंबर में कराने पर अभी संशय है। राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने यूपीटीईटी की निरस्त परीक्षा एक माह के अंदर कराने का दावा किया था। इस घोषणा के बाद 26 दिसंबर की तारीख पर मंथन शुरू हुआ। परीक्षा संस्था ने पहले इसी तारीख को इम्तिहान कराने का प्रस्ताव भेजा था। अफसर यह जांचने में जुटे थे कि इस तारीख को कोई और परीक्षा तो नहीं है। लेकिन, सीटीईटी यानी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बन सकती है, क्योंकि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पहली बार ये इम्तिहान आनलाइन करा रहा है। परीक्षा 16 दिसंबर से 15 जनवरी, 2022 तक चलेगी। इसमें वे अभ्यर्थी भी शामिल होते हैं, जो यूपीटीईटी के दावेदार हैं। ऐसे में यूपीटीईटी जल्द कराना विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी।

रविवार को दो पालियों में यूपीटीईटी 2021 होना था। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक हो गया। सरकार ने इम्तिहान शुरू होते ही दोनों पालियों की परीक्षा निरस्त कर दी। इसमें 21.65 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होने वाले थे। इंटरनेट मीडिया पर पेपर लीक करने सहित साल्वर गिरोह के करीब तीन दर्जन आरोपितों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले की जांच एसटीएफ कर रही है। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने से पहले ही प्रश्नपत्र नकल माफिया तक कैसे पहुंचा, इसे लेकर परीक्षा संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के अफसर व कर्मचारियों की छानबीन की जा रही है।

सचिव संजय उपाध्याय निलंबित : यूपीटीईटी के पेपर लीक मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मंगलवार को बड़ी कार्रवाई हुई है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें अहम कार्य में गोपनीयता न बरतने और परीक्षा की शुचिता बरकरार न रख पाने में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी होगी। उपाध्याय को शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय से संबद्ध किया गया है, नए सचिव की तैनाती का इंतजार है।

शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय से संबद्ध : बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव अनामिका सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यूपीटीईटी पूरी शुचिता, नकलविहीन व शांतिपूर्ण ढंग से कराई जानी थी। परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो जाने से इम्तिहान की शुचिता प्रभावित हुई है और साफ है कि इसमें गोपनीयता नहीं बरती गई। पूरी परीक्षा को निरस्त किए जाने से शासन की छवि भी धूमिल हुई है। इसलिए सचिव संजय उपाध्याय को निलंबित किया गया है, उनके खिलाफ अनुशासनिक जांच शुरू होगी। निलंबित सचिव संजय शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। उनके स्थान पर अभी नए सचिव की तैनाती नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, मामले की जांच कर रही एसटीएफ की रिपोर्ट आने पर अन्य आरोपितों पर भी बड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

योगी सरकार में पीएनपी के दूसरे सचिव पर हुई कार्रवाई : शासन ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर यह दूसरी बार बड़ी कार्रवाई है। 68,500 शिक्षक भर्ती में कापी बदलने व सही से मूल्यांकन न करने पर तत्कालीन सचिव सुत्ता सिंह व परीक्षा नियंत्रक जीवेंद्र सिंह ऐरी सहित अन्य को निलंबित किया गया था। दोनों बहाल हो चुके हैं। अबकी बार संजय उपाध्याय निलंबित किए गए हैं।

परीक्षा एजेंसी को भी काली सूची में डालने की तैयारी : प्रदेश सरकार सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी पर कार्रवाई करने के बाद अब परीक्षा एजेंसी, जिसने प्रश्नपत्र की छपाई की उस पर कड़ी कार्रवाई करेगी। एजेंसी को काली सूची में डाले जाने के साथ ही अन्य विधिक कार्रवाई करने की तैयारी है।

Edited By: Umesh Tiwari