लखनऊ, राज्य ब्यूरो। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सतर्कता जांच में दोषी पाए गए अपने पांच कार्मिकों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दे दी है। आयोग ने सतर्कता निदेशक को इन कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन के लिए स्वीकृति भेज दी है। सतर्कता जांच में दोषी पाए गए आयोग के इन पांच कर्मचारियों में तत्कालीन अनुभाग अधिकारी रामबाबू यादव, प्रवर वर्ग सहायक अनुराग यादव, जंग बहादुर, वीरेंद्र कुमार यादव व सुरेंद्र कुमार शामिल हैं।

मामला सपा शासनकाल में हुई भर्ती से जुड़ा है। इस भर्ती के लिए वर्ष 2016 में विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें आयोग के माध्यम से 54 विभागों में वैयक्तिक सहायक व आशुलिपिक के 808 पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। इन भर्तियों में अनियमितता के आरोप लगे थे। योगी सरकार ने सतर्कता अधिष्ठान से इसकी खुली जांच कराई थी। प्रारंभिक जांच में शिकायतें सही पाए जाने पर सतर्कता अधिष्ठान ने शासन से अनुमति लेकर इन कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज कराई थी।

जांच में कार्मिकों के दोषी पाए जाने पर सतर्कता अधिष्ठान ने शासन से इनके खिलाफ अभियोजन के लिए स्वीकृति मांगी थी। इन कर्मचारियों का नियुक्ति प्राधिकारी उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग है। इसलिए कार्मिक विभाग ने आयोग को दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति देने के बारे में निर्णय लेने के लिए कहा था।

Edited By: Anurag Gupta