यूपी का 'आरआरटीसी' मॉडल, अब छोटे शहरों में भी संभव हैं जटिल प्रसव; योगी सरकार ने बदला हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का चेहरा
योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत हुआ है। आरआरटीसी मॉडल के तहत 20 मेडिकल कॉलेज ...और पढ़ें

यूपी में जटिल प्रसव अब स्थानीय स्तर पर संभव
HighLights
यूपी का स्वास्थ्य ढांचा आरआरटीसी मॉडल से मजबूत हुआ।
जटिल प्रसव और गंभीर बीमारियों का इलाज अब जिलों में।
1,791 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण मिला, जीवन रक्षा दर बढ़ी।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पिछले नौ वर्षों में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। सरकार के ठोस प्रयासों का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि अब जटिल प्रसव और गंभीर बीमारियों के मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की पुरानी प्रवृत्ति में भारी कमी आई है। प्रदेशवासियों को अब उनके अपने ही जिले में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि जीवन रक्षा की दर भी बढ़ी है।
आरआरटीसी मॉडल: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का सुरक्षा कवच
मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने की चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार ने रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (RRTC) मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया है। वर्तमान में प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेज इस मॉडल के तहत 'नॉलेज हब' के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह सिस्टम जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञों की कमी को दूर करने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में 'सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन' साबित हो रहा है।
प्रशिक्षण से सशक्त हुए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ
इस मॉडल की सफलता का आधार केवल बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि मानव संसाधन का सशक्तीकरण है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान 'नॉलेज हब' बनकर अलीगढ़, हाथरस और कासगंज जैसे जिलों के स्टाफ को ऑन-साइट मेंटरिंग और निरंतर मार्गदर्शन दे रहे हैं, जिससे वे अब सबसे जटिल मामलों को भी आत्मविश्वास के साथ संभालने में सक्षम हैं।
जमीनी हकीकत: कासगंज बना बदलाव की मिसाल
आरआरटीसी मॉडल का सबसे प्रभावी असर कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखने को मिलता है। जहां साल 2017 में एक सफल सी-सेक्शन होना बड़ी बात थी, आज वहां का ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह सुसज्जित है और जटिल प्रसवों का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर ही हो रहा है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां 'हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी' जैसी जानलेवा स्थितियों को डॉक्टरों ने अपनी ट्रेनिंग के दम पर पहचान कर सफल सर्जरी की और मां व बच्चे दोनों की जान बचाई।
कोविड संकट में भी नहीं थमी सेवाओं की रफ्तार
यह मॉडल न केवल सामान्य समय में बल्कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी बेहद प्रभावी रहा। चुनौतीपूर्ण समय में भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का प्रशिक्षण जारी रखा गया। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि संकट के दौर में भी संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल जैसी अनिवार्य सेवाएं बाधित न हों, जो इस मॉडल की मजबूती और दूरदर्शिता को दर्शाता है।
