UPPCL: पावर कारपोरेशन ने अगले वर्ष बिजली दर बढ़ाने के लिए दाखिल किया प्रस्ताव, 16 प्रतिशत हो सकती है महंगी
लखनऊ: पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग में अगले साल बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 16% तक की वृद्धि संभावित है। 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव में 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व अंतर दिखाया गया है। हालांकि, पंचायत और विधानसभा चुनावों के कारण, दरों में वृद्धि की संभावना कम है, क्योंकि उपभोक्ताओं का पहले से ही 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। लगातार छठवें वर्ष बिजली की दरों के यथावत रहने के बाद पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने अगले वर्ष बिजली की दरों में बढ़ोतरी के लिए विद्युत नियामक आयोग में एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) प्रस्ताव दाखिल किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुक्रवार को दाखिल किए गए 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव में लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व गैप दिखाया गया है। आयोग द्वारा प्रस्ताव स्वीकारऩे की दशा में गैप की भरपाई के लिए 16 प्रतिशत बिजली महंगी हो सकती है।
हालांकि, अगले वर्ष पंचायत चुनाव और फिर वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव हैं इसलिए माना जा रहा है कि अगले वित्तीय वर्ष में भी बिजली की दरों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं होने वाली है।मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिजली कंपनियों को एआरआर तथा वित्तीय वर्ष 2024–25 का ट्रू-अप प्रस्ताव 30 नवंबर तक आयोग में दाखिल करना होता है लेकिन आयोग ने इस बार 15 दिसंबर तक सही आंकड़ों के साथ टैरिफ प्रस्ताव दाखिल करने की मोहलत कंपनियों को दे दी थी लेकिन शुक्रवार देर रात चुपचाप कारपोरेशन प्रबंधन ने आयोग में प्रस्ताव दाखिल कर दिया।
सूत्रों के अनुसार लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये का एआरआर प्रस्ताव दाखिल किया गया है। प्रस्ताव में 90 हजार करोड़ रुपये बिजली खरीदने के लिए रखे गए हैं। विद्युत वितरण हानियां 13 प्रतिशत बताई गई हैं। मौजूदा दरों से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये और ट्रूअप वर्ष 2024-25 से तकरीबन चार हजार करोड़ रुपये का राजस्व गैप दिखाया गया है।
गैप की भरपाई के लिए कारपोरेशन प्रबंधन ने मौजूदा बिजली की दरों में बढ़ोतरी का अभी कोई प्रस्ताव तो आयोग में दाखिल नहीं किया है लेकिन जानकार बताते हैं कि यदि वितरण हानियां व राजस्व गैप को आयोग पूरी तरह से स्वीकारता है तो अगले वर्ष पहली अप्रैल से औसतन 16 प्रतिशत बिजली महंगी हो सकती है।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा का कहना है कि भले ही कारपोरेशन प्रबंधन लगातार बिजली की दरों को बढ़वाने में लगा है लेकिन जब उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ रुपये बिजली कंपनियों पर सरप्लस है तब अगले पांच वर्ष तक बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होने दी जाएगी।
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विदित हो कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिजली कंपनियों ने एक-दो नहीं बल्कि पांच बार अलग-अलग संशोधित प्रस्ताव आयोग में दाखिल किए थे, जिसकी वजह से प्रक्रिया पूरी करने में समय लगा और टैरिफ आर्डर 22 नवंबर को जारी हो सका था।
मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए पहले लगभग 24 हजार करोड़ रुपये का घाटा दिखाते हुए दाखिल एआरआर से बिजली दरों में लगभग 28 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित की गई थी लेकिन सुनवाई आदि की प्रक्रिया के बाद बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का ही लगभग 18,000 करोड़ रुपये सरप्लस निकल आय़ा। वास्तव में मौजूदा बिजली दरों में 13 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए थी लेकिन आयोग ने कारपोरेशन की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए दरों को यथावत बनाए रखने का ही आदेश किया।

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