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यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल

Published: Thu, 24 Sep 2026 09:25 PM (IST)

उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था अब AI, IoT और आधुनिक इंजीनियरिंग से लैस होकर स्मार्ट जल प्रबंधन की ओर बढ़ ...और पढ़ें

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HighLights

  1. AI-IoT से स्मार्ट सिंचाई और जल प्रबंधन प्रणाली का प्रदर्शन।

  2. बाढ़ नियंत्रण में आधुनिक तकनीक, उत्तर प्रदेश देश में प्रथम।

  3. 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' से सिंचाई क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था अब केवल नहरों और नलकूपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आधुनिक इंजीनियरिंग के दौर में प्रवेश कर चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले एक दशक में प्रदेश के जल प्रबंधन और सिंचाई क्षेत्र में हुए इसी ऐतिहासिक बदलाव की झलक 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS 2026) में देखने को मिलेगी। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित हो रहे इस ट्रेड शो के चौथे संस्करण में उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (हॉल नंबर-6) अपना पवेलियन लगा रहा है। यहां आमजन से लेकर तकनीकी विशेषज्ञ तक विभाग के लाइव इंजीनियरिंग मॉडल और तकनीकी नवाचारों से रूबरू हो सकेंगे।

19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार

सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के अनुसार, इस पवेलियन में बाणसागर, अर्जुन सहायक और सरयू नहर जैसी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परियोजनाओं की सफलता को लाइव मॉडल के जरिए दर्शाया जाएगा। पिछले साढ़े नौ वर्षों में योगी सरकार ने 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित किया है और 2.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया है। कुल 19.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस सिंचाई नेटवर्क का सीधा फायदा प्रदेश के 44.81 लाख किसान परिवारों को मिल रहा है।

SCADA और AI से हो रहा स्मार्ट जल प्रबंधन

विभाग के पवेलियन का सबसे बड़ा आकर्षण 'स्मार्ट सिंचाई प्रणाली' होगी। मुख्य अभियंता (यांत्रिक) उपेंद्र सिंह ने बताया कि अब नहरों और नलकूपों का संचालन AI और IoT के जरिए हो रहा है। प्रदेश के 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर 'स्काडा' (SCADA) सिस्टम लगाया गया है। इसके जरिए अब फाटकों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और रियल-टाइम डेटा की मॉनिटरिंग सीधे कंट्रोल रूम से की जा रही है, जिससे पानी की एक-एक बूंद का सटीक प्रबंधन संभव हो पाया है।

बाढ़ नियंत्रण की आधुनिक तकनीक, यूपी देश में प्रथम

प्रदर्शनी में बाढ़ नियंत्रण के लिए अपनाए गए आधुनिक उपायों को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा। कंक्रीट मैट्रेस, टेट्रापॉड और शीट पाइल जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से तटबंधों को सुरक्षित किया जा रहा है। प्रदेश की गंगा, यमुना, रामगंगा और बेतवा सहित 11 नदियों पर 'फ्लड प्लेन जोनिंग' का काम पूरा कर उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा महाकुम्भ के दौरान गंगा को चैनलाइज करने और बिजनौर में ड्रेजिंग के जरिए नदियों के प्रवाह को सुरक्षित बनाने के सफल मॉडल भी यहां प्रदर्शित किए जाएंगे।

'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' और सोलर ऊर्जा पर जोर

कम पानी वाले क्षेत्रों, विशेषकर बुंदेलखंड में 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) अभियान के तहत प्रेशर और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया गया है। हमीरपुर, महोबा और ललितपुर के साथ-साथ सिद्धार्थनगर और गोरखपुर में विकसित की गई प्रेशर सिंचाई प्रणालियों से हजारों किसानों को लाभ मिला है। इसके साथ ही, यूपी सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत नलकूपों, लिफ्ट नहरों और मुख्य नहर प्रणालियों को सोलर पैनल से लैस कर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाए गए हैं।

अंतिम छोर तक पहुंचा पानी, सिल्ट सफाई में रिकॉर्ड

प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि नहरों का पानी टेल (अंतिम छोर) पर बैठे किसान के खेत तक पहुंचे। इसके लिए नहरों की सिल्ट सफाई के दायरे को 27,551 किलोमीटर से बढ़ाकर 55,320 किलोमीटर कर दिया गया है। नतीजतन, खरीफ और रबी दोनों फसलों के दौरान टेल तक पानी पहुंचने के आंकड़ों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के इन निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश का कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से छलांग लगाकर अब 106.82 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।