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'जेब तो आमजन की ही कटेगी', उत्तर प्रदेश में UPI को राजनीतिक मुद्दा बनाकर बढ़त लेने में जुटा विपक्ष

Published: Sat, 19 Sep 2026 06:12 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में ₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लागू होने से राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। सपा, ...और पढ़ें

यूपी में यूपीआई एमडीआर पर सियासी संग्राम चुनाव से पहले गरमाया।

यूपी में यूपीआई एमडीआर पर सियासी संग्राम चुनाव से पहले गरमाया।

HighLights

  1. ₹2000 से अधिक UPI भुगतान पर MDR लागू, यूपी में सियासी घमासान।

  2. सपा, बसपा, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा, जनता पर बोझ बताया।

  3. भाजपा का बचाव, यह शुल्क आम उपभोक्ता पर नहीं लगाया गया।

दिलीप शर्मा, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले मोबाइल फोन से होने वाला भुगतान भी राजनीति के मैदान में उतर गया है। दो हजार रुपये से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने को लेकर सियासी घमासान मच गया है। सपा, बसपा और कांग्रेस इसके सहारे भाजपा पर हमलावर हैं।

शुल्क के सहारे सरकार पर मुनाफाखोरी के लिए टैक्स वसूली, पूंजीपतियों के साथ से लेकर आमजन की जेब काटने तक के अपने पुराने आरोपों को नई धार देने में जुट गए हैं। फैसले को जनता के खिलाफ और भाजपा के जनविरोधी होने का आरोप लगाया जा रहा है।

भाजपा और केंद्र सरकार यह स्पष्ट करने में जुटे हैं कि यह आम उपभोक्ता पर लगाया गया शुल्क नहीं है। हालांकि उसके लिए यह चुनौती आसान नहीं। नई व्यवस्था में दो हजार रुपये से अधिक के उपभोक्ता टू मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क होगा और 75 हजार रुपये से ऊपर एक लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा रहेगी।

सरकार के नियम पालन का भरोसा दिलाने के बावजूद आशंका जताई जा रही है कि व्यापारी अंतत: यह शुल्क उपभोक्ता से ही वसूलेंगे। विपक्ष को इसी आशंका के मुद्दे में बदलने पर चुनावी ‘कमाई’ होती दिख रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे नोटबंदी से जोड़ते हुए कहा है कि पहले ही नुकसान जनता का हुआ था, अब भाजपा सरकार यूपीआई पेमेंट पर चुंगी वसूलना चाहती है।

बसपा अध्यक्ष मायावती ने इसे मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत टैक्स वसूली बताया है और कहा है कि इसे चाहे जो भी नाम दिया जाए, जेब तो अंततः आमजन की ही कटेगी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। भाजपा कह रही है कि इसे आम आदमी पर लगाया गया टैक्स बताना सही नहीं है।

व्यक्ति से व्यक्ति को भुगतान पूरी तरह निश्शुल्क है और छोटे कारोबारियों को भी सुरक्षा दी गई है। हालांकि व्यवस्था का असली राजनीतिक असर शुल्क के जमीन पर लागू होने के तरीके से तय होगा। यदि इसका असर कीमतों पर दिखता है तो विपक्ष को नैरेटिव आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।