लखनऊ, जेएनएन। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास ने उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता संजय तिवारी पर नियम विरुद्ध प्रोन्नति पाने के मामले में कार्रवाई की है। संजय को नियमों को ताक पर रखकर 2003 में सहायक अभियंता सिविल के पद से अधिशासी अभियंता के पद पर प्रोन्नत किया गया था। अब शिकायत पर जांच हुई तो आरोप सही मिलने पर उन्हें पद से रिवर्ट किया गया है।

1998 में उप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम (अब यूपीसीडा) में अधिशासी अभियंता के चार पदों पर पदोन्नति होनी थी। चयन समिति की बैठक में छह सहायक अभियंताओं में से चार को प्रोन्नति दी जानी थी। इसमें अनुसूचित जाति का एक पद और सामान्य वर्ग के तीन पदों पर सहायक अभियंता प्रोन्नत होकर अधिशासी अभियंता बनाए जाने थे। बैठक में इन पदों को भरने के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया और उच्चाधिकारियों को अपनी संस्तुति सहित रिपोर्ट भेज दी गई।

चूंकि एक पद पर प्रोन्नति नहीं हो सकती थी, क्योंकि सहायक अभियंता एके नरूला ने उस समय कोर्ट में याचिका दायर कर रखी थी, इसलिए एक पद को रिक्त रखा गया। सुनवाई के बाद उनकी याचिका कोर्ट से खारिज हो गई। उस समय प्रोन्नति न पाने वाले तत्कालीन सहायक अभियंता संजय तिवारी व आरके श्रीवास्तव को अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त काम सौंपा गया। वे इस कार्य को करते रहे। वक्त बीतता गया और दोबारा प्रोन्नति के लिए चयन समिति की बैठक नहीं हुई।

1998 में हुई बैठक के आधार पर ही 2003 में दोनों सहायक अभियंताओं को प्रोन्नत कर दिया गया। किसी भी चयन समिति की बैठक के निर्णय एक साल के लिए ही मान्य होते हैं। ऐसे में पांच साल बाद प्रोन्नति नहीं मिलनी चाहिए थी, इसलिए प्रोन्नति देने से पहले दोबारा बैठक करानी चाहिए थी या फिर सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो से यह राय ली जानी चाहिए थी कि प्रोन्नति कैसे करनी है। आरके श्रीवास्तव अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि संजय तिवारी कानपुर स्थित यूपीसीडा मुख्यालय में तैनात हैं।

अब प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने उन्हेंं रिवर्ट कर दिया है और कहा है कि तत्काल सहायक अभियंता सिविल के पद पर योगदान दें।

Posted By: Umesh Tiwari

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