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पूर्वांचल की ग्रामीण महिलाएं बनीं डिजिटल डेयरी क्वीन, करोड़ों का कारोबार संभालकर बनीं लखपति दीदी

Published: Fri, 19 Jun 2026 05:30 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में 50 हजार ग्रामीण महिलाएं डिजिटल होकर करोड़ों का डेयरी कारोबार संभाल रही हैं, जिससे 12 ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 50 हजार ग्रामीण महिलाएं हुईं डिजिटल साक्षर।

  2. 'काशी ई-डेयरी' ऐप से दूध कारोबार में पारदर्शिता।

  3. 12 हजार महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी' आत्मनिर्भर।

डिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों में महिला सशक्तिकरण और डिजिटल साक्षरता की एक नई और प्रेरणादायक कहानी लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और प्राथमिकताओं के चलते पूर्वांचल की करीब 50 हजार ग्रामीण महिलाएं अब पूरी तरह हाईटेक हो चुकी हैं। कभी घर और पशुपालन तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज मोबाइल ऐप और डिजिटल मशीनों के जरिए दूध के संग्रह, शुद्धता की जांच, बिक्री और पूरे रिकॉर्ड मैनेजमेंट का काम खुद संभाल रही हैं।

योगी सरकार की इस खास पहल का नतीजा यह है कि वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, सोनभद्र, बलिया और भदोही जैसे जिलों की ग्रामीण महिलाएं मिलकर हर दिन 2 लाख लीटर से अधिक दूध का कारोबार कर रही हैं। बिचौलियों के चंगुल से मुक्त होकर शुरू हुए इस डिजिटल डेयरी मॉडल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है।

'काशी ई-डेयरी' ऐप से आया पारदर्शिता का नया दौर

काशी दुग्ध उत्पादक संस्था के तहत गांवों में स्थापित दुग्ध संग्रह केंद्रों को पूरी तरह डिजिटल उपकरणों से जोड़ दिया गया है।

  • पारदर्शी जांच: दुग्ध केंद्रों पर आते ही दूध की मात्रा और उसमें फैट की जांच ऑटोमैटिक डिजिटल मशीनों से की जाती है।

  • ऐप पर रियल-टाइम डेटा: दूध की क्वालिटी और वजन की पूरी जानकारी तुरंत 'काशी ई-डेयरी' ऐप पर ऑनलाइन दर्ज हो जाती है। इससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो गई है।

डीबीटी से सीधे खाते में भुगतान, बिचौलियों का खेल खत्म

इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें पशुपालकों को अपनी मेहनत की कमाई के लिए भटकना नहीं पड़ता।

  • हर 10 दिन के अंतराल पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भुगतान की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच जाती है।

  • महिलाएं अपने मोबाइल ऐप पर दूध की बिक्री, फैट की स्थिति और अपने दैनिक कारोबार का पूरा ब्यौरा लाइव देख सकती हैं।

12 हजार महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'

तकनीक और इस पारदर्शी व्यवस्था की बदौलत गांवों की करीब 12,000 महिलाएं आत्मनिर्भर होकर 'लखपति दीदी' की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। नियमित और सम्मानजनक आय होने से गांवों में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बना रोल मॉडल

पूर्वांचल का यह डिजिटल डेयरी नेटवर्क आज देश के लिए महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का एक बेहतरीन उदाहरण बन चुका है। इसने न केवल डेयरी क्षेत्र को आधुनिक बनाया है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार और डिजिटल साक्षरता को भी एक नया आयाम दिया है।