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जिन डॉक्टरों पर तंबाकू छुड़ाने की जिम्मेदारी, वो खुद लत के शिकार; KGMU के सर्वे में खुलासा

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:08 AM (IST)

केजीएमयू के एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के तंबाकू उन्मूलन केंद्रों पर तैनात डॉक्टर खुद तंबाकू ...और पढ़ें

केजीएमयू

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HighLights

  1. केजीएमयू सर्वे: तंबाकू उन्मूलन डॉक्टर खुद करते हैं सेवन।

  2. 14.8% डेंटिस्टों ने स्वीकारा तंबाकू सेवन, लत छुड़ाने में बाधा।

  3. कई डॉक्टरों के पास तंबाकू परामर्श का विशेष प्रशिक्षण नहीं।

मनीषा गोस्वामी, लखनऊ। जिन डॉक्टरों को यूपी के विभिन्न तंबाकू उन्मूलन केंद्र में लोगों में तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए तैनात किए गए वे स्वयं तंबाकू सेवन करते पाए गए। उनकी यह आदत लोगों की लत छुड़ाने में सबसे बड़ी बाधा बनी।

यह बात केजीएमयू के कम्युनिटी डेंटिस्ट्री (सार्वजनिक स्वास्थ्य दंत चिकित्सा) विभाग के सर्वे में सामने आई। हाल ही में एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, तंबाकू उन्मूलन केंद्र पर तैनात डॉक्टर तंबाकू की लत के खुद शिकार थे।

सर्वे में शामिल 14.8% डेंटिस्टों ने माना कि वे स्वयं तंबाकू का सेवन करते है। यह शोध विभाग के शोधकर्ता श्रीजा गुम्मल्ला, गौरव मिश्रा, सुमित कुमार, विनय कुमार गुप्ता, निशिता कनकने, दीपक एस, सिर्फसा दिवाकर, आयुषी अग्रवाल और आदित्य अग्रवाल ने किया।

264 डॉक्टरों पर हुआ सर्वे, सिर्फ 37 फीसदी के पास था परामर्श का विशेष प्रशिक्षण

यह सर्वे वर्ष 2018 के बाद बीडीएस पास कर प्रैक्टिस करने वाले यूपी के 264 डेंटिस्टों पर किया गया। इसमें सामने आया कि तंबाकू उन्मूलन केंद्रों में बीडीएस के 83.7% डॉक्टरों में से सिर्फ 37.1% के पास परामर्श का विशेष प्रशिक्षण था। साथ ही, डेंटिस्ट परामर्श की औपचारिक प्रक्रिया, दवाइयां देने और नियमित फालोअप लेने में काफी ढिलाई करते पाए गए।

तंबाकू छुड़ाने के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं

शोधकर्ताओं के अनुसार, मेडिकल की डिग्री होना मरीजों की तंबाकू छुड़ाने के लिए काफी नहीं है। इसके लिए तंबाकू छुड़ाने की काउंसिलिंग को नियमित इलाज का अनिवार्य हिस्सा बनाना जरूरी है। साथ ही, शिक्षा में व्यावहारिक बदलाव और डॉक्टरों को प्रेरित करने की भी जरूरत है क्योंकि मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए डेंटिस्टों की भूमिका बेहद अहम है।

तंबाकू के दुष्प्रभावों से रोज हो रही 3,500 लोगों की मौत

केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने भी तंबाकू के सेवन पर चिंता जाहिर की। उनके अनुसार भारत में लगभग 3500 लोगों की मौत रोज तंबाकू सेवन के खतरनाक दुष्प्रभावों होती है। वहीं, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में तंबाकू का सेवन बढ़ा है। पुरुषों में तंबाकू का सेवन 2019-21 में 44% से बढ़कर 2023-24 में 45.2% हो गया। वहीं, महिलाओं में यह 8.5% से बढ़कर 9.6% हो हुआ।

तंबाकू से हो सकते हैं 40 तरह के कैंसर

डॉ. सूर्यकांत के मुताबिक, तंबाकू के धुएं से 7,000 हानिकारक रासायनिक पदार्थ निकलते हैं। इनमें निकोटीन और टार प्रमुख हैं। इसके धुएं में लगभग 150 ऐसे तत्व मिलते हैं, जिससे 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं। इसके अलावा 25 तरह की अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। बीड़ी या सिगरेट का धुआं पीने वाले के फेफड़े में 30 प्रतिशत जाता है व आसपास के वातावरण में 70 प्रतिशत रह जाता है, जिससे परिवार के लोग और उसके मित्र प्रभावित होते हैं।

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