UP News: लखनऊ, राज्य ब्यूरो। बच्चों को मोबाइल फोन का लती और घर से बाहर निकलने में आनाकानी करने की तोहमत मढ़ने वाले हम बड़े भी उन्हें खेलने-कूदने से रोकने के कम जिम्मेदार नहीं हैं। पार्क से बच्चों को बड़े लोग यह कहकर भगा देते हैं कि उछल-कूद करने से पार्क खराब जो जाएगा। ऐसे में वह निराश होकर घर वापस आ जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। खेल विभाग ने आवास व शहरी नियोजन और नगर विकास विभाग को बच्चों को पार्कों में खेलने से न रोकने और कम से कम एक पार्क उनके लिए आरक्षित करने के लिए पत्र लिखा है।

अपर मुख्य सचिव, खेल नवनीत सहगल के मुताबिक उत्तर प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खेल एसोसिएशन व संस्थाओं के साथ बैठक की गई तो यह तथ्य सामने आया कि शहरों में विकास प्राधिकरण व नगर निगम के पार्कों का विकास किया जाता है, लेकिन बच्चों को वहां खेलने से रोका जाता है। शहरों में तमाम मोहल्लों में यह बड़े विवाद का भी कारण बनता है। ऐसे में बच्चों को भी खेलने की समुचित जगह नहीं मिल पाती।

पार्कों में बच्चों के खेलने की मिले पूरी छूट

आवास व शहरी नियोजन विभाग को विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद की कालोनियों में तथा नगर विकास विभाग को नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित विभिन्न पार्कों में से कम से कम एक पार्क बच्चों के खेलने के लिए उपलब्ध कराए जाने को कहा गया है ताकि उसमें बच्चों के खेलने की पूरी छूट हो। खेल इंडिया के माध्यम से खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ बच्चों को पार्कों में खेलने से रोका जा रहा है, यह नहीं चलेगा।

स्कूलों में खेलों को प्रोत्साहित किया जाए

माध्यमिक व बेसिक शिक्षा के स्कूलों में छात्रों से खेल के लिए वसूली जाने वाली फीस को अब आसानी से अन्य जरूरतों पर खर्च नहीं किया जा सकेगा। अपर मुख्य सचिव खेल नवनीत सहगल ने प्रमुख सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा दीपक कुमार को इस संबंध में पत्र लिखकर कहा है कि स्कूलों में खेलों को प्रोत्साहित किया जाए।

स्कूलों में खेल सुविधाओं का नियमित प्रयोग हो

एसीएस खेल नवनीत सहगल ने पत्र में लिखा है कि खेल विभाग खेल से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने की कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इस दौरान सुझाव आया है कि स्कूलों में खेल सुविधाओं का प्रयोग छात्र-छात्रों द्वारा सही ढंग से नहीं किया जाता। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्र-छात्रों द्वारा नियमित रूप से खेल सुविधाओं का इस्तेमाल हो।

खेल फीस को खेलों पर ही करें खर्च

यही नहीं स्कूलों द्वारा खेल सुविधा के नाम पर वसूली जाने वाली खेल फीस का इस्तेमाल क्या वाकई में खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन पर ही खर्च की जा रही है। उन्होंने प्रमुख सचिव दीपक कुमार से कहा है कि हर छात्र से वसूली जाने वाली फीस का हिस्सा खेलों पर की खर्च किया जाना अनिवार्य किया जाए।

Edited By: Umesh Tiwari

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