यूपी के 35 जिलों में रैन बसेरों के लिए चिह्नित नहीं किए जा सके स्थल, 13 में फसलों के मुआवजा वितरण में देरी
उत्तर प्रदेश के 35 जिलों में रैन बसेरों के लिए अभी तक जगह नहीं मिल पाई है, जिससे बेघर लोगों को ठंड में परेशानी हो सकती है। वहीं, 13 जिलों में किसानों ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य के रैनबसेरों व अलाव की जिओ-टैगिंग की जा रही है। इसके चलते रैन बसेरों व अलाव की सटीक जानकारी राहत आयुक्त कार्यालय को प्राप्त हो रही है। अभी तक सर्दी के मद्देनजर केवल 40 जिलों में रैन बसेरों के लिए स्थलों को चिह्नित करने का काम पूरा किया सका है, जबकि 35 जिलो में रैन बसरों के लिए स्थलों का चयन नहीं किया जा रहा है। राहत आयुक्त डा. हृषिकेश भास्कर यशोद संबंधित जिलों के अपर जिलाधिकारियों को 24 घंटे में रैन बसरों के लिए स्थलों का चयन करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने मंगलवार को सभी जिलों के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के साथ राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों के प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कंबल क्रय, अलाव, रैनबसेरों की अद्यतन स्थिति जानी तथा शीतलहर से आमजन को सुरक्षित रखने के सभी आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए।
40 जिलों में रैन बसेरों के लिए 278 स्थलों को चिह्नित कर लिया गया है। 42 जिलों में अलाव जलाने के लिए 1517 स्थलों को चिह्नित कर लिया गया है, जबकि 33 जिलों में अभी तक अलाव के लिए जगह चिह्नित नहीं कि जा सकी हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल द्वारा कंबल वितरण, रैन बसेरों तथा अलाव की रियल टाइम मानीटरिंग के लिए राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा एक एप विकसित किया गया है।
राहत आयुक्त ने फसल क्षति के सापेक्ष राहत वितरण की समीक्षा में गाजीपुर, महोबा, मिर्जापुर, उन्नाव, झांसी, बलिया, मथुरा, मुजफ्फरनगर, चंदौली, हरदोई, जालौन, आगरा व अमरोहा में राहत राशि की देयता लंबित होने पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि फसल क्षति पर प्रत्येक दशा में किसानों को 24 घंटे के अंदर राहत राशि दी जाए। उन्होंने आपदाओं से जनहानि के लंबित प्रकरणों में समय से राहत राशि का वितरण न करने पर बहराइच, हरदोई, सोनभद्र, प्रयागराज, उन्नाव, कासगंज, अमेठी, लखीमपुर खीरी, कानपुर नगर तथा कुशीनगर के संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए तत्काल राहत राशि वितरित करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।

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