लखनऊ [जितेंद्र शर्मा]। यूपी की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति ऑनलाइन प्रणाली भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में अन्य राज्यों की तुलना में सक्षम है। उत्तर प्रदेश के पोर्टल 'सक्षम' को बेहतर मानते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इसे नजीर बनाने जा रहा है। यहां के ऑनलाइन सिस्टम की खूबियों को मंत्रालय सभी राज्यों के लिए गाइडलाइन में शामिल करेगा।

छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश के लिए समाज कल्याण विभाग ने नेशनल इनफॉर्मेशन सेंटर (एनआइसी) की मदद से 2013-14 में पहली बार छात्रों से ऑनलाइन फॉर्म भरवाए। पैसा समाज कल्याण अधिकारियों को भेजा गया। उन्होंने छात्रों के खातों में पैसा ट्रांसफर किया। 2014-15 में पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) को अपना लिया गया। इसके जरिये समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, जनजाति विकास विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति मुख्यालय द्वारा सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाने लगी। सारा डेटाबेस स्टेट डाटा सेंटर पर आ गया। फॉर्म भरने से लेकर कॉलेजों द्वारा कोर्स, फीस, प्रोफाइल लोड करने, विवरण का सत्यापन सहित सभी कार्य पोर्टल के माध्यम से होने लगा। सत्यापन के लिए ऐसे बिंदु शामिल किए गए हैं, जिसमें फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर है।

नोडल अधिकारी छात्रवृत्ति सिद्धार्थ मिश्रा ने बताया कि यूपी और तमिलनाडु के पोर्टल सराहे गए हैं। इसमें भी उप्र को नंबर माना गया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सचिव नीलम साहनी सत्यापन की प्रक्रिया से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने पूरी जानकारी ले ली है। सचिव का कहना है कि जल्द ही केंद्र सरकार छात्रवृत्ति के लिए सभी राज्यों को वह गाइडलाइन जारी करेगी, जो यूपी सरकार के पोर्टल सक्षम में हैं।

यूपी की मदद से पोर्टल बना रही पंजाब सरकार

पिछले दिनों पंजाब से समाज कल्याण विभाग के निदेशक और अन्य अधिकारी आए थे। उन्होंने समाज कल्याण निदेशालय पहुंचकर यूपी के सक्षम पोर्टल की जानकारी ली। उसी की तर्ज पर वह अपना पोर्टल बना रहे हैं। जल्द ही फिर आएंगे। बताया गया है कि सॉफ्टवेयर न होने की वजह से पंजाब के कई कॉलेजों ने एक साल में पांच-पांच बार छात्रवृत्ति ले ली थी। घोटाला हुआ और कई अधिकारी जेल गए।

नहीं स्वीकारा केंद्र का सॉफ्टवेयर

केंद्र सरकार ने 2015 में अपना पोर्टल बनाया, जिसे यूपी ने स्वीकार नहीं किया। नाराज केंद्र सरकार ने उप्र, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र की जांच कैग से कराई। उसमें भी उप्र के मॉडल को सर्वश्रेष्ठ बताया गया।

Posted By: Umesh Tiwari

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