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योगी सरकार का सड़क सुरक्षा पर सख्त संदेश, चालान का मकसद सिर्फ जुर्माना नहीं; हासिल करना है शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य

Published: Sun, 16 Aug 2026 07:04 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपी में सड़क सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग ने 20 लाख से अधिक चालान ...और पढ़ें

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HighLights

  1. परिवहन विभाग ने 20 लाख से अधिक चालान किए।

  2. कुल 646 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क वसूला गया।

  3. उद्देश्य राजस्व नहीं, 'शून्य मृत्यु दर' का लक्ष्य।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख बेहद सख्त है। राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और 'शून्य मृत्यु दर' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिवहन विभाग लगातार मुस्तैद दिख रहा है। सीएम योगी के निर्देशों के तहत परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल ने प्रदेश भर में व्यापक जांच अभियान चलाया, जिसका बड़ा असर आंकड़ों में साफ देखने को मिल रहा है। विभाग ने हाल के वर्षों में 20 लाख से अधिक चालान कर कुल 646 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क (जुर्माना) वसूला है।

15 लाख चालानों के जरिए 474 करोड़ का जुर्माना

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि सुरक्षित आवागमन और यातायात अनुशासन सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश भर में करीब 15 लाख वाहनों के चालान काटे गए। इस बड़े पैमाने पर की गई प्रवर्तन कार्रवाई के माध्यम से विभाग ने 474 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क जमा किया। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि सड़कों पर नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ विभाग की सतर्कता लगातार बनी हुई है।

4 महीनों में ही 5 लाख चालान

परिवहन विभाग की यह सख्ती चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी दोगुनी गति से जारी है। वित्तीय वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही विभाग ने प्रदेश भर में करीब 5 लाख चालान किए हैं। इन सख्त कार्रवाइयों के जरिए 172 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क प्राप्त हो चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और लापरवाह वाहन चालकों को चिन्हित करने के लिए निगरानी तंत्र को पहले से अधिक मजबूत कर दिया गया है।

राजस्व नहीं, सड़क सुरक्षा में अनुशासन

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस कड़ाई और चालान की प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य महज राजस्व संग्रह करना नहीं है, बल्कि वाहन चालकों के भीतर यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी और अनुशासन का भाव पैदा करना है। नियमों के सख्त पालन से ओवरस्पीडिंग, बिना वैध दस्तावेजों के वाहन चलाने, क्षमता से अधिक माल या सवारी ढोने (ओवरलोडिंग) जैसे जानलेवा उल्लंघनों पर प्रभावी रोकथाम में मदद मिलती है।

नागरिकों की भागीदारी से ही पूरा होगा 'जीरो एक्सीडेंट' का सपना

परिवहन विभाग का मानना है कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था तभी पूरी तरह सफल हो सकती है जब वाहन चालक और आम नागरिक भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। विभाग द्वारा चलाई जा रही सख्त प्रवर्तन कार्रवाई इसी सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ कर रही है। सरकार को विश्वास है कि नियमों के प्रति यह कड़ा और निरंतर प्रयास उत्तर प्रदेश को निकट भविष्य में 'शून्य मृत्यु दर' के राष्ट्रीय विजन की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।