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डिस्काउंट और हीरे की अंगूठी मिलने के चक्कर में न पड़े घर खरीदार, यूपी रेरा अब परमिट नंबर से जांचेगा प्रोजेक्ट

Published: Tue, 12 May 2026 12:49 PM (IST)

यूपी रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने घर खरीदारों को लुभावने वादों से बचने की सलाह दी और बताया कि अब ...और पढ़ें

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धर्मेश अवस्थी, लखनऊ। एक एकड़ जमीन खरीदने वाले प्रमोटर नक्शे में छेड़छाड़ करके तीन एकड़ तक भूखंड बेच रहे हैँ? घर, दुकान या फिर फ्लैट बेचने के लिए तरह-तरह के लुभावने वादे किए जा रहे? कोई मनचाही ट्रिप पर भेजने का वादा कर रहा तो कोई हीरे की अंगूठी बांट रहा तो कोई डिस्काउंट देने का बोर्ड सजाए है। ऐसे में खरीदार क्या करे, वो कैसे जाने कि यह संपत्ति सही है?

दैनिक जागरण के सोमवारीय विमर्श में ऐसे ज्वलंत सवालों की गुत्थी उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) संजय भूसरेड्डी ने सुलझाई।

भूसरेड्डी ने समझाया, सेवा से रिटायर होने के बाद घर खरीदने की परंपरा रही है, युवा इसे तेजी से बदल रहे, वो किराये पर मकान लेने की जगह किस्तों पर भुगतान करके अपना घर चाहते हैं। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर से अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैँ।

बड़े से लेकर छोटे शहरों तक निवेश लाने और हाउसिंग स्टाक बढ़ाने को यूपी रेरा प्रयासरत है। रेरा सिर्फ घर दिलाने में योगदान नहीं कर रहा, बल्कि योजना का भूखंड, नक्शा आदि में गड़बड़ियां न हो इसका भी प्रबंध कर रहा।

प्रमोटर से अब रेरा नक्शा नहीं मांगेगा, बल्कि उसके परमिट नंबर से ही पूरे प्रोजेक्ट की जांच हो जाएगी। यूपी रेरा रेरा 2.0 एप लांच करने की तैयारी में जुटा है, इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग होगा।

यूपी रेरा की जरूरत क्यों पड़ी और इसकी जिम्मेदारी क्या है? इस संबंध में अध्यक्ष ने कहा, अलीगढ़ जिले में यमुना एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के समय टप्पल व गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिले के दो पड़ोसी गांव भट्ठा-परसौल में मई 2011 में कम मुआवजे और जबरन जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन की पुनरावृत्ति रोकने व कई आवासीय प्रोजेक्ट को उबारने के लिए 2016 में यूपी रेरा का गठन हुआ था।

उन्होंने कहा, निवेश लाने व हाउसिंग स्टाक बढ़ाने के साथ ही प्रमोटर, होम बायर्स व एजेंट के विवाद यूपी रेरा सुलझाता रहा है। एडवोकेसी के माध्यम से घर व दुकान खरीदारों को जागरूक किया जा रहा है।

रेरा अध्यक्ष ने कहा, लखनऊ व ग्रेटर नोएडा में 60 हजार से अधिक वाद विभिन्न योजनाओं के संबंध में दायर हैं। इनमें 40 हजार से अधिक प्रकरण सिर्फ एनसीआर क्षेत्र के हैं। प्रमोटर डेढ़ एकड़ जमीन खरीद कर ढाई एकड़ में अतिक्रमण करके भूखंड बेचते रहे।

इसे रोकने के लिए चेन आफ सेल डीड यानी बिक्री की रजिस्ट्रियां जांची जाती रही, फिर रेरा का यूआरएल यानी आधिकारिक वेबसाइट, पीआरजी यानी रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर, लांच डेट आदि ब्रोशर आदि में लिखने का नियम बनाया गया। अब क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करके योजना की पूरी जानकारी ले सकते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा, घर खरीदारों को लुभावने उपहार के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। न ही योजना में स्वीमिंग पूल, क्लब और जिम होने के झांसे में आएं। अक्सर लोग इन्हीं के चक्कर में फंसकर लाखों रुपये गवां देते हैँ।

समझाया, डिजिटल अरेस्ट के नए-नए प्रकरण सामने आ रहे, किसने सोचा था कि इनमें पढ़े-लिखे लोग फंसेंगे। ऐसे ही ही प्रमोटर भी नए नए खेल कर रहे, उनका भरोसा कायम रखने के लिए रेरा कार्य कर रहा।

भूसरेड्डी ने कहा, यूपी रेरा भले ही नौ साल का हो गया है लेकिन, इतने समय में संस्थान का समग्र आंकलन नहीं कर सकते। 2007 से 2018 तक का बैकलाग है भले ही 87 प्रतिशत मुकदमों का निस्तारण कर दिया है लेकिन, अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।

उन्होंने स्वीकारा, रियल एस्टेट के संबंध में नकारात्मक माहौल बना था, पहले कोई भी संस्था का एजेंट बन जाता था। इधर दो साल से एजेंट की ट्रेनिंग शुरू कराई है। संस्था के 7023 एजेंट हैँ। 37 बैच में 2755 में से 1493 को प्रशिक्षित किया जा चुका है, चार दिन में एजेंटों को रेरा रेगुलेशन पढ़ाकर परीक्षा लेकर सर्टिफिकेट दिया जाता है।

भूसरेड्डी ने बताया, कोविड के समय लोगों की मौत होने पर उनके परिवारजनों को आसानी से संपत्ति का हस्तांतरण हो इसके लिए रक्त संबंध में 1000 रुपये प्रोसेसिंग फीस लेने का नियम बनाया।

दो टूक कहा, प्रमोटर संपत्ति का मूल्य पहले ले चुका है हस्तांतरण में 200 से 800 रुपये वर्ग फीट धनराशि वसूलना पूरी तरह से गलत है। कानूनी वारिस के इतर लोग 25 हजार रुपये देकर संपत्ति अपने नाम करा सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 25 मार्च को नियमों में संशोधन करके अपंजीकृत प्रमोटरों को रेरा के दायरे में लाया गया है। इसमें वे ही दायरे में आएंगे जिनकी संपत्ति 500 वर्ग मीटर और आठ यूनिट्स से ज्यादा होगी। रेरा की निगाह में सरकारी, कोआपरेटिव व प्राइवेट प्रमोटर बराबर हैं।