यूपी रेरा की खरीददारों को सलाह, फ्लैट खरीदते समय कारपेट एरिया को ही बनाएं आधार
UP RERA: घर खरीददार किसी भी संपत्ति के लेन-देन को अंतिम रूप देने से पहले वे यूपी रेरा के वेब पोर्टल पर उस परियोजना की जानकारी देख सकते हैं।

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी
HighLights
क्षेत्रफल को लेकर यूपी रेरा की सलाह आपकी सहायता करेगी
आवासीय इकाइयों (फ्लैटों) की खरीद कारपेट एरिया के आधार पर ही करें
जागरण संवाददाता, लखनऊ। यूपी-रेरा (उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) समय-समय पर खरीददारों को उपयोगी सलाह देता रहता है। अब फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बेहद उपयोगी जानकारी दी गई है।
यदि आप फ्लैट खरीदने जा रहे हैं तो उसके क्षेत्रफल को लेकर यूपी रेरा की सलाह आपकी सहायता करेगी। यूपीरेरा ने घर के खरीददारों को सलाह दी है कि वे आवासीय इकाइयों (फ्लैटों) की खरीद कारपेट एरिया के आधार पर ही करें, क्योंकि कारपेट एरिया फ्लैट के अंदर उपलब्ध वास्तविक रहने योग्य स्थान को दर्शाता है। जबकि बिल्डर घर खरीददारों को सुपर बिल्ट-अप एरिया की जानकारी देते हैं। इससे अक्सर फ्लैट स्वामी ठगे महसूस करते हैं।
यूपी रेरा के पास इस तरह की कई शिकायतें आ रही हैं। यूपी रेरा के मुताबिक अपार्टमेंट की जानकारी देने और उसकी बिक्री के लिए कारपेट एरिया को ही मानक आधार निर्धारित किया गया है। किसी परियोजना में बिक्री के लिए उपलब्ध अपार्टमेंटों की संख्या, प्रकार और उनके कारपेट एरिया की जानकारी प्रमोटर को यूपी रेरा पोर्टल पर देना अनिवार्य है। इसके साथ ही अपार्टमेंट से जुड़ी विशेष बालकनी, बरामदे और विशेष खुली छत (टेरेस) के क्षेत्रफल की जानकारी भी देनी होती है।
नियमों में निर्धारित बिक्री अनुबंध (एग्रीमेंट फार सेल) के प्रारूप में भी अपार्टमेंट की बिक्री केवल कारपेट एरिया के आधार पर करने का प्रविधान किया गया है। बिल्डर सुपर बिल्ट-अप एरिया में कारिडोर, सीढ़ियां, लिफ्ट क्षेत्र, लाबी, क्लब हाउस और अन्य साझा सुविधाओं जैसे कामन एरिया का आनुपातिक हिस्सा को कारपेट एरिया में जोड़कर उसकी गलत जानकारी ग्राहकों को देते हैं, इससे कुल क्षेत्रफल फ्लैट के वास्तविक उपयोग योग्य क्षेत्र की तुलना में काफी अधिक दिखाई देता है। घर खरीददार किसी भी संपत्ति के लेन-देन को अंतिम रूप देने से पहले वे यूपी रेरा के वेब पोर्टल पर उस परियोजना की जानकारी देख सकते हैं।
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority) एक वैधानिक संस्था है, जिसे घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने, रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और बिल्डरों/प्रोजेक्ट्स को विनियमित करने के लिए 2016 में स्थापित किया गया था।
यूपी-रेरा की प्रमुख सेवाएं और लाभ
प्रोजेक्ट्स का पंजीकरण: यूपी में कोई भी बिल्डर रेरा में पंजीकरण (Registration) कराए बिना कोई प्रोजेक्ट लॉन्च या फ्लैट नहीं बेच सकता। यदि बिल्डर समय पर पजेशन (कब्जा) नहीं देता, फ्लैट में खराब निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो आप ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही खरीदार प्रोजेक्ट्स का नक्शा, डिलीवरी की समय-सीमा और अप्रूव्ड लेआउट सीधे पोर्टल पर देख सकते हैं।
