यूपी में रेंट एग्रीमेंट के नियमों में बड़ा बदलाव, मकान मालिक और किरायेदार दोनों को बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश सरकार ने मकान मालिक और किरायेदारों को राहत देते हुए रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण शुल्क में भारी कटौती की है।

कैबिनेट की बैठक के बाद कैबिनेट ब्रीफिंग की तस्वीरें।
HighLights
रेंट एग्रीमेंट पंजीकरण शुल्क में भारी कटौती की गई।
10 लाख तक के किराये पर 90% तक छूट मिलेगी।
मकान मालिक और किरायेदारों को मिली बड़ी राहत।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य सरकार ने मकान मालिक और किरायेदारों को बड़ी राहत देते हुए किराया अनुबंध (रेंट एग्रीमेंट) की पक्की लिखी-पढ़ी (रजिस्टर्ड एग्रीमेंट) का खर्चा घटा दिया है। अब एक वर्ष के रेंट एग्रीमेंट को पंजीकृत कराने पर सिर्फ दो हजार रुपये ही खर्च होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये के 10 वर्ष के लिए अनुबंध पर 90 प्रतिशत तक की छूट देने का निर्णय किया गया।
किरायेदारी के कागजात का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि सरकार ने किराएदारी से जुड़े नियमों (उप्र नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021) को पूरी तरह से लागू करने के साथ ही मकान मालिक और किरायेदार को राहत देने के लिए अहम निर्णय किया है।
उऩ्होंने बताया कि एक वर्ष से ज़्यादा अवधि की किरायेदारी के कागजात का रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके लिए उचित स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन फीस देना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर स्टांप वाद दायर होने के साथ ही बकाया स्टांप शुल्क आदि चुकाना पड़ सकता है।
सिर्फ दो हजार रुपये ही लगेंगे
जायसवाल ने बताया कि अब तक एक वर्ष के लिए दो लाख रुपये तक के वार्षिक किराये के किराया अनुबंध को पंजीकृत कराने का खर्चा 10 हजार रुपये लगता था, लेकिन अब सिर्फ दो हजार रुपये ही लगेंगे।
इसमें एक हजार रुपये स्टांप शुल्क और एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस के होंगे। इसी तरह 10 वर्ष के लिए 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये के मामले में अभी दो लाख रुपये खर्च होते हैं लेकिन अब 26 हजार रुपये ही लगेंगे।
स्थायी तौर पर छूट देने का निर्णय
मंत्री ने स्पष्ट किया कि 10 लाख रुपये से ज्यादा वार्षिक किराये के मामले में किसी तरह की छूट नहीं होगी लेकिन अब 10 लाख रुपये तक के किराये पर छूट के बाद शेष किराया राशि पर ही मौजूदा व्यवस्था के तहत स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी। टोल टैक्स या खनन (माइनिंग) से जुड़े पट्टों (लीज़) के मामले में छूट नहीं होगी।
जायसवाल ने बताया कि पिछले वर्ष 19 नवंबर से छह माह की अवधि के लिए छूट की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके सकारात्मक परिणाम आने पर अब स्थायी तौर पर छूट देने का निर्णय किया गया है।
हालांकि, गौर करने की बात यह है कि पूर्व में छह माह के लिए दी गई छूट से लगभग 8.31 करोड़ रुपये की राजस्व हानि को देखते हुए अब स्थायी तौर पर लागू की गई व्यवस्था में छूट की सीमा कुछ कम कर दी गई है। पहले जहां किराये अनुबंध का खर्चा एक हजार से 20 हजार रुपये तक तय था वहीं अब दो हजार से 26 हजार तक तय किया गया है।
औसत वार्षिक किराये पर पक्की लिखा-पढ़ी का खर्चा (रुपये में)
| अवधि | दो लाख तक | दो से छह लाख | छह से 10 लाख तक |
| एक वर्ष तक के लिए | 2000 | 6000 | 9000 |
| एक से पांच वर्ष तक | 4000 | 12,000 | 20,000 |
| पांच से 10 वर्ष तक | 8000 | 16,000 | 26,000 |
उल्लेखनीय है कि रेंट एग्रीमेंट, रजिस्टर्ड कराने पर अभी औसत वार्षिक किराये का चार प्रतिशत से भी ज्यादा का खर्चा आता है। यही कारण है कि फ्लैट-मकान मालिक और किरायेदार ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड नहीं कराते हैं।
चूंकि कानूनन एक वर्ष से कम अवधि के रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड कराने की अनिवार्यता नहीं है इसलिए ज्यादातर मामले में 100 रुपये के स्टांप पेपर पर रेंट एग्रीमेंट से ही काम चलाया जाता है। ऐसे में किरायेदार को लेकर विवाद पर मकान मालिक को थाने से कोर्ट तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
