लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग पहली बार प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र और छात्राओं को यूनीफार्म, स्कूल बैग, स्वेटर और जूता-मोजा का भुगतान जल्द करेगा। चारों सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों के बैंक खाते में धन भेजा जाना है। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी बच्चों के अभिभावकों ने जो बैंक खाता नंबर विद्यालयों को मुहैया कराया है, उससे वे लेन-देन अनिवार्य रूप से करें, अन्यथा धन उनके खाते में भेजा जाना संभव नहीं हो सकेगा, क्योंकि बैंक खाते का सक्रिय होना जरूरी है, निष्क्रिय खाते में धन नहीं भेजा जा सकता।

उत्तर प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से लेकर आठ तक के करीब पौने दो करोड़ छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग बीते वर्षों में यूनीफार्म, स्कूल बैग, स्वेटर व जूता-मोजा एजेंसियों के माध्यम से जिलावार वितरित कराता रहा है। हर बार उनकी उपलब्धता के समय और गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में विभाग ने निर्णय लिया कि बच्चों की चारों सामग्री उनके अभिभावक ही खरीदें, इसके लिए उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत धन भेजे जाने पर सहमति बनी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विद्यालयों में 20 सितंबर से अभिभावकों का नाम व बैंक खाता नंबर आदि एप पर अपलोड किया जा रहा है, यह कार्य अब अंतिम चरण में है। विद्यालयों के शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं व अभिभावकों से पूरा ब्योरा लेकर एप पर लगभग फीड कर दिया है। इन दिनों खंड शिक्षाधिकारी उनकी जांच करके नाम व बैंक खाता नंबर आदि प्रमाणित कर रहे हैं, जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। विभाग ने यह भी निर्देश दिया था कि बैंक खाता आधार व मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए। शिक्षकों ने इसके लिए प्रयास करके यह कार्य पूरा कराया है।

शिक्षा निदेशक बेसिक डा. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे यह प्रचार-प्रसार कराएं कि सभी अभिभावकों का बैंक खाता आधार व मोबाइल नंबर से लिंक होने के साथ ही सक्रिय हो, तभी धनराशि उनके आधार से बैंक खाते में भेजी जा सकेगी।

निर्देश है कि अभिभावकों को बताया जाए कि वे संबंधित बैंक खाते से लेन-देने अनिवार्य रूप से कर लें, अन्यथा धन खाते में भेजा नहीं जा सकेगा। इसके लिए खंड शिक्षाधिकारी, प्रधानाध्यापक व शिक्षकों को निर्देशित करें कि वे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को तत्काल अवगत कराएं कि वे लेन-देन जरूर कर लें। बैंक छह माह में धन की निकासी न होने पर खाते को निष्क्रिय कर देता है।

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Edited By: Umesh Tiwari